जिला अस्पताल में फिजीशियन के कक्ष के बाहर बैठे मरीज।
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बांदा। डिप्थीरिया और वायरल बुखार के साथ अब डेंगू भी जानलेवा होता जा रहा है। शनिवार को जिला अस्पताल में डेंगू पीड़ित एक महिला की मौत हो गई। उधर, जिला अस्पताल के ब्लड बैंक प्रभारी और मेडिकल कॉलेज के दो कर्मी भी डेंगू की चपेट में आ गए हैं। जांच में इनकी प्लेटलेट्स बेहद कम हैं। इसके अलावा 25 से 30 मरीजों का प्राइवेट अस्पतालों में इलाज चल रहा है।
शहर मुख्यालय से सटे दरदा गांव के पुन्ना की पत्नी सुमतिया (45) को तीन दिन से बुखार आ रहा था। घरवाले उसे शहर के एक प्राइवेट अस्पताल ले गए। यहां उसकी हालत बिगड़ गई। डॉक्टर ने रेफर कर दिया तो परिजन शनिवार की दोपहर जिला अस्पताल ले आए। यहां कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई। पति पुन्ना ने बताया कि प्राइवेट पैथोलॉजी की जांच में सुमतिया में डेंगू की पुष्टि हुई थी।
उधर, जिला अस्पताल ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. अंकित सिंह को एक सप्ताह पूर्व बुखार आया था। वह छुट्टी लेकर अपने घर प्रयागराज चले गए। वहां जांच में डेंगू पॉजिटिव पाए गए। वहीं पर उनका इलाज चल रहा है। दूसरी तरफ मेडिकल कॉलेज की कर्मचारी अपर्णा द्विवेदी और आदित्य कुमार की प्लेटलेट्स कम हो गई हैं। इन्होंने खुद को प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया है। जिला मलेरिया अधिकारी पूजा अहिरवार ने बताया कि सितंबर में भी डेंगू के तीन मरीज मिले थे। चपेट में आने वाले तीन नए मरीजों की रिपोर्ट उन तक नहीं पहुंची है।
बुखार से पीड़ित छह और पीड़ितों को शनिवार को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इसमें तीन में डिप्थीरिया के लक्षण पाए गए हैं। भर्ती कराए गए मरीजों में पदारथपुर (चिल्ला) निवासी दिनेश कुमार का बेटा अश्वनी (10), पुनाहुर (बिसंडा) निवासी राम मिलन का बेटा अरुण (10), चहुरी पुरवा (सजेती, कानपुर) निवासी बदलुआ की बेटी शिवानी (18), अछरौड़ (मटौंध) निवासी अचला (25), भदावल (बदौसा) निवासी शारदा प्रसाद की बेटी कोमल (5), इंदिरा नगर निवासी संध्या (19) शामिल हैं। इनमें अरुण, अचला और कोमल में डिप्थीरिया के लक्षण बताए गए हैं। उन्हें अलग वार्ड में रखा गया है। शुक्रवार को भी दो डिप्थीरिया पीड़ित बच्चे भर्ती हुए थे। इस तरह से डिप्थीरिया से पीड़ित बच्चों की संख्या जिले में नौ हो गई है।