जिला अस्पताल के आरओ प्लांट के सूखे पड़े नल।
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बांदा। जिला अस्पताल की बदहाली मरीजों पर भारी पड़ रही है। करीब तीन दिन से यहां पानी का भीषण संकट है। आरओ प्लांट के नल सूखे हैं। शौचालयों तक में पानी नहीं है। मरीज और उनके तीमारदारों को पीने समेत अन्य जरूरी कार्यों के लिए पानी बाहर से ढोकर लाना पड़ रहा है। सबसे बुरा हाल डायलिसिस यूनिट में है। यहां मरीजों को डायलिसिस में फिल्टर पानी लगता है, लेकिन संकट के चलते यहां 2000 रुपये से प्रतिदिन चार टैंकर पानी मंगाए जा रहे हैं। यूनिट प्रभारी और मरीजों ने इसकी शिकायत डीएम और सीएमएस से की है।
जिला अस्पताल परिसर में पीपीपी मॉडल पर 10 बेड का डायलिसिस यूनिट संचालित है। प्रतिदिन तीन शिफ्टों में 30 मरीजों की डायलिसिस की जाती है। प्रत्येक मरीज पर चार घंटे की डायलिसिस में 170 लीटर पानी खर्च होता है। यानी प्रतिदिन 30 मरीजों पर 5100 लीटर पानी खर्च हो रहा है। पानी का संकट यहां के मरीजों के लिए परेशानी का सबब बन रहा है। यूनिट प्रभारी शनि सिंह ने बताया कि रोजाना चार टैंकर पानी मंगाया जा रहा है। प्रत्येक टैंकर की कीमत 500 रुपये के हिसाब से प्रतिदिन 2000 रुपये खर्च आ रहा है। बताया कि आरओ में फिल्टर होने के बाद पानी का डायलिसिस में इस्तेमाल किया जाता है। फिल्टर में 1000 लीटर में लगभग 650 लीटर पानी बर्बाद हो जाता है। कंपनी अधिकारियों समेत डीएम और सीएमएस को समस्या से अवगत कराया दिया है।
सीएमएस डॉ. एसएन मिश्र से सीधी बात
1. पानी के संकट से मरीज और तीमारदार परेशान हैं? आपने क्या किया?
जवाब- सुबह-शाम जलापूर्ति होती है। पर्याप्त पानी न मिलने से संकट हो गया। जल संस्थान अभियंता को जानकारी दी गई है।
2. डायलिसिस यूनिट में टैंकर से पानी आ रहा है? मरीजों में गुस्सा है?
जवाब- मजबूरी है। भरपूर पानी नहीं आ रहा। अस्पताल परिसर में बना टैंक खाली पड़ा है। ऐसे में यूनिट को जलापूर्ति कैसे होगी।
3. आपने डीएम या जल संस्थान अभियंता से बात की या नहीं?
जवाब- डीएम साहब को तो अवगत नहीं कराया, पर जल संस्थान एक्सईएन को जानकारी दी है। बताया कि लीकेज से समस्या है। कर्मी लीकेज दुरुस्त कर रहे हैं।