बांदा। दलालों के मकड़जाल से परिवहन विभाग उबर नहीं पा रहा। ऑनलाइन सुविधा के बावजूद भोले-भाले लोग इनके चक्कर में फंसकर मुंहमांगी कीमत चुका रहे हैं। ड्राइविंग लाइसेंस, नवीनीकरण, पंजीकरण आदि में मनमाने रुपये वसूले जा रहे हैं।
एआरटीओ प्रशासन की सख्ती से कुछ दिनों तक दलालों से निजात रही, लेकिन अब फिर कार्यालय के आसपास इनका जमघट लगने लगा। ऑनलाइन आवेदन करने के बावजूद विभिन्न पेच फंसने से लोग दलालों की शरण में पहुंचकर अपने काम करा रहे हैं। बानगी के तौर पर अस्थाई ड्राइविंग लाइसेंस का शुल्क 350 रुपये है, लेकिन दलाल 4500 रुपये से ज्यादा वसूलते हैं।
शहर से लगभग चार किलोमीटर दूर बबेरू रोड पर किराये के भवन में चल रहे परिवहन विभाग में लाइसेंस, पंजीकरण, फिटनेस, ट्रांसफर आदि जल्दी नहीं होते, लेकिन दलाल इन कामों को आसानी से करा देते हैं। इसके एवज में मुंहमांगा पैसा ऐंठते हैं। हालत यह है कि बाहर से लेकर दफ्तर के अंदर तक इनका बेधड़क दखल रहता है।
ऑनलाइन आवेदन में लर्निंग (अस्थायी) ड्राइविंग लाइसेंस के लिए 350 रुपये और परमानेंट (स्थायी) लाइसेंस के लिए 1000 रुपये शुल्क निर्धारित हैं। फिर भी सरलता से काम न होने पर लोग दलालों के चक्कर में फंसकर 4000 से 4500 रुपये खर्च कर काम करा रहे हैं। खास बात यह है कि टेस्ट भी नहीं देना होता।
चार्ट
कार्य ऑनलाइन शुल्क दलाल वसूलते
ड्राइविंग लाइसेंस (अस्थायी) 350 4500
लाइसेंस नवीनीकरण 300 1900
फिटनेस (कामर्शियल वाहन) 800 10,000
ट्रांसफर (बस, ट्रक व अन्य) 750 6000
अर्दली बाजार निवासी अविनाश गुप्ता ने बताया कि ऑनलाइन आवेदन किया था। दो बार टेस्ट दिया, पर सफल नहीं हुए। ऑफिस के कई चक्कर लगाए, फिर भी काम नहीं हुआ। एक पहचान वाले को 4500 रुपये दिए तो बिना टेस्ट के लाइसेंस बन गया।
बिसंडा गांव के प्रदीप कुमार श्रीवास ने बताया कि डीएल के लिए आवेदन किया था। कई चक्कर लगाने के बाद भी लाइसेंस नहीं बना। मजबूरन उसे दलाल से काम कराना पड़ा। अस्थायी और स्थायी लाइसेंस की दोनों फीस एक साथ देने पर आसानी से लाइसेंस बन गया।
अब सारे काम ऑनलाइन होते हैं। निर्धारित शुल्क भी ऑनलाइन जमा होते हैं। दफ्तर के अंदर दलालों के प्रवेश पर सख्त रोक है। सभी पटल प्रभारियों को भी इसके निर्देश दिए गए हैं। दफ्तर में किसी पटल पर कोई दलाल मिलता है तो संबंधित के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। किसी ने दलाली से संबंधित कोई शिकायत नहीं की। कोई शिकायत मिलती है तो कार्रवाई की जाएगी। ऑनलाइन आवेदन करने वाले सीधे विभागीय कर्मियों से मिलें। कोई शिकायत है तो उन्हें बताएं, लेकिन दलालों के पास न जाएं।-शंकरजी सिंह, एआरटीओ, बांदा।