खप्टिहाकलां (बांदा)। केन नदी में नहाते समय दो बालिकाएं डूबने लगीं। वहां मौजूद व्यक्ति ने एक बालिका को बचा लिया, जबकि दूसरी गहरे पानी में डूब गई। करीब पांच घंटे बाद उसका शव मिला। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
पैलानी थाना क्षेत्र के गांव खप्टिहाकलां निवासी सुरेश प्रजापति की बेटी खुशबू (17) और श्याम सुंदर प्रजापति की पुत्री आरती (16) सोमवार को महालक्ष्मी पर्व पर गांव की महिलाओं के साथ केन नदी में पाथा दाई मंदिर स्थित घाट पर नहाने गई थीं। पैर फिसलने से खुशबू नदी में डूबने लगी। उसे बचाने गई आरती भी नदी में डूबने लगी।
घाट पर मौजूद आत्मस्वरूप विश्वकर्मा ने उन्हें बचाने के लिए नदी में छलांग लगा दी। तेज धारा में बह रही आरती को पकड़कर बाहर निकाल लिया, लेकिन खुशबू गहरे पानी में समा गई। वहां मौजूद नाविकों ने देर तक खोजबीन की, लेकिन वह नहीं मिली।
सूचना पर कुछ देर बाद पैलानी थानाध्यक्ष नंदराम प्रजापति और खप्टिहाकलां चौकी पुलिस पहुंची। गोताखोरों को बुलाकर खुशबू की खोजबीन में लगाया। लगभग पांच घंटे बाद खुशबू का शव घटनास्थल पर करीब 12 फीट गहराई में मिला। पुलिस ने शव निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
खुशबू और आरती अच्छी सहेलियां थीं। दोनों गांव स्थित परमहंस रणछोड़दास इंटर कॉलेज में 11वीं की छात्रा थीं। परिजनों ने बताया कि आरती और खुशबू की दोस्ती ऐसी थी कि दोनों हर काम साथ करती थीं। नदी में नहाते समय खुशबू को बचाने में आरती ने अपनी जान दांव पर लगा दी।
पितृ पक्ष के चलते घाट में मौजूद लोगों की कोशिश से आरती की जान तो बच गई, लेकिन खुशबू को नहीं बचाया जा सका। उसकी मौत से मां फूला देवी और भाई सुरेश बेहाल हैं। खुशबू मशहूर मंजीरा वादक छोटकू प्रजापति की नातिन थी।
पितृ पक्ष का पूजन करने के लिए नदी में मौजूद गांव के ही आत्मस्वरूप विश्वकर्मा और हिम्मत सिंह ने दोनों को बचाने में हिम्मत दिखाई। आत्मस्वरूप के पास पहुंचते ही डूब रही दोनों किशोरियां उनके कंधे पर चढ़ गईं। नतीजतन आत्मस्वरूप भी डूबने लगे।
उन्होंने घाट पर मौजूद महिलाओं से साड़ी फेंकने के लिए कहा। हिम्मत सिंह ने तुरंत साड़ी फेंकी। साड़ी के सहारे दोनों को लेकर बाहर आ रहे थे, लेकिन तेज बहाव के चलते खुशबू नहीं संभल पाई और हाथ छूट जाने पर डूब गई। यह बात आत्मस्वरूप ने पुलिस और परिजनों को बताई।