पानी के अभाव में सूख रही तिल की फसल।
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बांदा। कमजोर मानसून और कम बारिश होने से फसलें सूख रही हैं। एक सप्ताह बारिश और न हुई तो करीब 40 फीसदी फसल चौपट हो जाएगी। जुलाई माह में बारिश हुई तो किसानों ने कर्ज लेकर खेतों में बीज बो दिया। धान की बेड़ लगा दी, लेकिन अब सिंचाई के अभाव में फसलें सूखने की कगार पर हैं।
नलकूप व नहरें भी साथ नहीं दे रही हैं। अब किसानों के सामने फसल बचाने का संकट है। कुछ किसान निजी नलकूपों से फसलों को बचाने में लगे हैं। लेकिन जो ‘भगवान’ भरोसे हैं वह सिंचाई को पानी के लिए परेशान हैं।
हालांकि शासन के आदेश पर राजस्व विभाग व कृषि विभाग की संयुक्त टीम ने गांव-गांव नुकसान के सर्वे का काम शुरू कर दिया है। तीन दिन में संयुक्त टीम अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारियों के माध्यम से प्रदेश सरकार को भेजेंगी।
चित्रकूटधाम मंडल में मौसम विभाग के अब तक सभी पूर्वानुमान फेल साबित हुए हैं। जुलाई व अगस्त में बारिश हुई, लेकिन सितंबर में यह दगा दे गई। पिछले चार माह में औसत 809.65 मिलीमीटर (मिमी) बारिश होनी चाहिए, पर 497.29 मिलीमीटर बारिश हुई है।
बांदा में औसत बारिश 850.60 मिमी के सापेक्ष 312 मिमी बारिश हुई। यानी औसत से 74 फीसदी बारिश कम दर्ज की गई। दूसरे नंबर पर महोबा जिला है। यहां पर औसत 768 मिमी में से 365 मिमी बारिश हुई। यह औसत बारिश से 55 फीसदी कम है।