शहर के पद्माकर चौराहा में लगा कूड़े का ढेर।
- फोटो : BANDA
बांदा। स्वच्छता रैंकिंग में सुधार के बाद नगर पालिका बेफिक्र हो गई। इससे सफाई व्यवस्था धड़ाम हो गई है, जबकि नगर पालिका प्रशासन हर माह सफाई के नाम पर करीब 60 लाख रुपये खर्च कर रहा है। इससे दर्जन भर मोहल्लों में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं। नाले-नालियां कचरे से पटे हैं। दुर्गंध और मच्छरों के बीच मोहल्लावासी बेहाल हो रहे हैं।
पिछले माह अध्यक्ष के बर्खास्त होने के बाद से सफाई व्यवस्था और बद्तर हो गई है। नगर पालिका में स्थायी और अस्थायी करीब 100 सफाई कर्मी हैं। जनसुविधाओं के नाम पर नगर पालिका परिषद सिर्फ कोरम पूरा कर रहा है। शहर के 31 वार्डों में सफाई व्यवस्था धड़ाम है। सफाई कर्मी मोहल्ले में सफाई के नाम पर खानापूर्ति कर रहे हैं। इसकी पोल खुद शहर के बाशिंदे कर रहे हैं।
गुरुवार को शहर के पद्माकर चौराहा, चौक बाजार, डिग्गी चौराहा, सिविल लाइन, स्वराज कालोनी, डीएम कालोनी की गलियां, बंगालीपुरा, बिजलीखेड़ा, खुटला, रामलीला रोड, अमर टाकीज तिराहा समेत कई मोहल्लों जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे रहे। अन्ना मवेशी इनमें मुंह मारते और इधर-उधर बिखेरते रहते हैं। सड़ांध से राहगीरों का सांस लेना दूभर है।
शहर में पांच बड़े नाले और 45 छोटे नाले हैं। लगभग 50 हजार से ज्यादा घरों का गंदा पानी बड़े नालों से होकर निकलता है। बारिश से पूर्व नाले-नालियों की सफाई में नगर पालिका ने लगभग 25 लाख रुपये ठिकाने लगा दिए थे। अब फिर हालत जस की तस हो गई। बड़े-छोटे सभी नाले कचरे से पटे हैं। इन्हें साफ करने की जहमत नहीं उठाई जा रही है।
कचरे से पटा विधायक आवास के पास स्थित नाला।- फोटो : BANDA