वीरों की धरती कहे जाने वाले बुंदेलखंड का एक और वीर सपूत मातृ भूमि के लिए शहीद हो गया। 11 फरवरी की रात सियाचिन में सरहद पर गश्त के दौरान सूबेदार राजेश कुमार सिंह (43) दुश्मन फौज की दो गोलियों से वीरगति को प्राप्त हो गए। शनिवार को पैतृक गांव किधौली (बांदा) में शहीद का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
नरैनी प्रतिनिधि के अनुसार, किधौली गांव के रामराज सिंह का तीसरा बेटा राजेश कुमार 1989 में थल सेना के फर्स्ट मीडियम रेजीमेंट (कश्मीर वैली) में राजपूत बटालियन में सूबेदार पद पर भर्ती हुए थे। वह इन दिनों कश्मीर घाटी में तैनात थे। 11 फरवरी को रात अन्य जवानों के साथ पाक-चीन सीमा पर वह गश्त कर रहे थे तभी तड़के करीब ढाई बजे सीमा पार से चलाई गई दुश्मन की दो गोलियां उसके सीने में आ लगीं और वहीं वह शहीद हो गए।
सैनिक अफसरों ने औपचारिकताएं पूरी करने के बाद सेना के वाहन से शव को पैतृक गांव किधौली भेज दिया। सियाचिन से लखनऊ तक शव हवाई जहाज तक लाया। लखनऊ के एएमसी सेंटर में भी गार्ड ऑफ आनर दिया गया।
वहां से इलाहाबाद की टुकड़ी शव लेकर शनिवार को सुबह गांव पहुंची। शव के साथ थल सेना हवलदार अरुण कुमार सिंह सहित नायब सूबेदार रंजीत सिंह व एम चौधरी, लायंस नायक विपुल कुमार सिंह, सीपी सिंह और ईटी बेग, नायक दलजीत सिंह, अकरम अली तथा ओपीआर इंद्रजीत सिंह भी गांव आए।
पैतृक गांव में शहीद जवान को राष्ट्रीय ध्वज और उसकी वर्दी रखकर गार्ड ऑफ आनर दिया गया। सेना अफसरों ने फूल चढ़ाए। सांसद भैरों प्रसाद मिश्र, नायब तहसीलदार फूलचंद्र यादव, क्षेत्राधिकारी अरुण कुमार, कोतवाली प्रभारी केएन सिंह सहित बड़ी तादाद में किधौली व आसपास के गांवों के लोग और शहीद के परिजन व रिश्तेदार उपस्थित रहे। ‘
राजेश सिंह अमर रहे’ के दूर-दूर तक गूंज रहे नारों के बीच शहीद के छोटे भाई जगपाल सिंह ने मुखाग्नि दी। इस बीच तमाम लोगों की आंखें छलक आईं।
‘शहादत पर गर्व, नाती को भी बनाएगा फौजी’
दुखी बूढ़े पिता रामराज ने बेटे की शहादत पर फख्र जताया और कहा कि सरकार मौका देगी तो नातियों को भी फौज में भर्ती कराएगा। पिता ने बताया कि राजेश चार भाइयों में तीसरे नंबर का था। अन्य भाई खेतीबाड़ी करते हैं।
वहीं मां राजकुमारी के कानों में बेटे के शब्द बार-बार गूंज रहे हैं। उसने कहा था, ‘अगले माह भांजे की शादी में घर आएगा और सभी के लिए कपड़े लाएगा।’ मां ने बताया कि राजेश दशहरे में घर आया था। 9 मार्च को भांजे की शादी है।
पत्नी और बेटी-बेटा परिवार में
सूबेदार पद तक पहुंचे राजेश ने पढ़ाई की शुरुआत प्राइमरी स्कूल (शंकर पुरवा) से की थी। गुढ़ा गांव में जूनियर हाईस्कूल और एमपी के पन्ना से हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण की। वह अपने पीछे पत्नी सुनीता और पुत्र दीपक (18) तथा पुत्री प्राची (16) छोड़ गए हैं। अभी जोधपुर में रहकर मां के साथ बेटा दीपक और बेटी प्राची पढ़ाई कर रहे हैं।
सांसद बनवाएंगे स्मारक और गेट
शहीद के अंतिम संस्कार में आए सांसद भैरों प्रसाद मिश्र ने कहा कि किधौली गांव में शहीद की याद में स्मारक व द्वार बनवाया जाएगा। यह काम वह अपनी निधि से कराएंगे। गांव का विद्युतीकरण भी होगा। परिजनों को शासन से 50 लाख रुपये दिए जाने की मांग करेंगे।
अंतिम संस्कार में सपा नेता राम किशोर सिंह राजपूत, बसंत लाल पटेल, राजेंद्र मिश्रा और भाजपा नेता दिलीप सिंह राजपूत आदि शामिल रहे। उधर, कांग्रेस प्रदेश सचिव साकेत बिहारी मिश्र जिलाध्यक्ष अलिखेश शुक्ल, संतोष द्विवेदी, श्रीप्रकाश शुक्ल, राजबहोर शिवहरे और संदीप सिंह आदि ने शहीद के परिजनों से मिलकर संवेदना जताई।
एसडीएम बोले- हार्ट अटैक से मौत हुई
शहीद के अंतिम संस्कार में कोई अधिकारी शामिल नहीं हुआ। केवल अतर्रा एसडीएम आए मगर लेटलतीफ। मौत की वजह पर बोले शायद हार्ट अटैक से हुई है। यह भी कहा कि नियमानुसार शहीद के आश्रितों को मदद दिलाई जाएगी।
रास्ते में शहीद की पत्नी का पर्स पार
पति की शहादत की खबर पाकर जोधपुर से ससुराल किधौली गांव आ रही सुनीता का रुपयों से भरा पर्स ट्रेन में उचक्कों ने पार कर दिया। राजेश कश्मीर से पहले राजस्थान में तैनात थे।