कांस्टेबिल गनेश तिवारी व मंगल सिंह।
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बांदा। अदालत ने दोहरे हत्याकांड में दो सिपाहियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और इन पर 50-50 हजार रुपये जुर्माना भी ठोंका। इस घटना में लगभग 20 साल बाद फैसला आया है। फैसले के वक्त दोनों सिपाही अदालत में मौजूद थे, जिन्हें जेल भेज दिया गया। फतेहगंज थाना क्षेत्र के मजरा मुखियन पुरवा (पियार) निवासी मोतीलाल पुत्र भागवत रैदास ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 5 अप्रैल 1996 को वह अपनी जमीन पर मकान बना रहा था। इसी बीच फतेहगंज थाने के सिपाही मंगल सिंह व गनेश तिवारी आए। इनके पास सरकारी राइफलें थीं। इनके साथ बृजगोपाल पुुत्र रामचंद्र भी था। दोनों सिपाहियों ने एसडीएम का स्टे आदेश बता कर मकान का काम बंद करा दिया। उसे और उसके भाई लालमन समेत कारीगरों और मजदूरों को थाने चलने को कहा। इनकार करने पर सिपाही गनेश तिवारी ने उसे राइफल की नाल मारकर लहूलुहान कर दिया। सिपाही मंगल सिंह ने लालमन को बटों से पीटा। इस बीच सिपाही गनेश ने लालमन की गोली मारकर हत्या कर दी। इसके बाद मंगल सिंह ने वहां मौजूद पटवा पर गोली चला दी।
इलाज के लिए ले जाते समय पटवा ने भी दम तोड़ दिया। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद दोनों सिपाहियों को सस्पेंड कर दिया गया था। विवेचना के बाद दोनों सिपाहियों और बृजगोपाल के विरुद्ध अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया गया। इस समय तीनों जमानत पर थे। विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) की अदालत में सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी राघवेंद्र प्रताप सिंह सेंगर ने छह गवाह पेश किए। गुरुवार को न्यायाधीश डीपीएन सिंह ने फैसला सुनाया। सिपाही मंगल सिंह पुत्र दिलीप सिंह (खनपना, कानपुर देहात) व गनेश तिवारी पुत्र मिश्रीलाल त्रिपाठी (नवाबगंज, इलाहाबाद) को धारा 302 व एससी/एसटी एक्ट में उम्रकैद व 20-20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। जुर्माना अदा न करने पर दो-दो साल की कैद और भुगतनी होगी। धारा 325 में पांच-पांच साल कैद व 10-10 हजार रुपये जुर्माना हुआ। जुर्माना अदा न करने पर एक-एक साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। जुर्माने की रकम से 25-25 हजार रुपये दोनों मृतकों की पत्नियों को देने के आदेश हुए हैं। अपराध साबित न होने पर बृजगोपाल को दोषमुक्त कर दिया गया।