बांदा। जनपद में रोजाना 20 से 30 हजार एंटीबायोटिक दवाओं की खपत है। यह आंकड़े सरकारी और निजी मेडिकल स्टोर के हैं। एंटीबायोटिक दवाओं की बढ़ती खपत देख इस पर अंकुश लगाने की कवायद की जा रही है। शासन ने गाइड लाइन जारी की है, अब बिना डॉक्टर के लिखे कोई भी मेडिकल स्टोर संचालक इन दवाओं की बिक्री न कर सकेगा।
अब डॉक्टरों को भी एंटीबायोटिक दवा लिखते वक्त पर्चे पर ही उसका कारण भी लिखना होगा। स्वास्थ्य महानिदेशक दवा विक्रेताओं व डॉक्टरों के संगठनों को लिखे पत्र में कहा है कि मरीज को एंटीबायोटिक दवा देने से पहले डॉक्टर अन्य विकल्प भी विचार कर लें। दवा विक्रेता भी बिना डॉक्टर के पर्चे के एंटीबायोटिक दवा को न बेचें।
इस आदेश के अनुपालन में जनपद के आकड़ों पर गौर करें तो यहां प्रतिदिन सरकारी और निजी मेडिकल स्टोरों में 20 से 30 हजार एंटीबायोटिक दवाओं की खपत हो रही है।
इस विषय में जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एसएन मिश्रा का कहना है कि डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवाओं को भी दवा वितरण कक्ष से वितरित कराया जाता है। इसमें एंटीबायोटिक दवाओं के अलावा भी अन्य दवाएं रहती हैं। अब इसमें कमी लाने का प्रयास किया जाएगा।
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एंटीबायोटिक के लगातार सेवन से आदी हो जाता मरीज
विशेषज्ञों के मुताबिक डॉक्टर व मेडिकल स्टोर संचालक अक्सर पर्चे का बिल बढ़ाने के लिए दवाओं के साथ एंटीबायोटिक दवाएं जैसे सीरप, कैप्सूल व टेबलेट आदि लिख देते हैं। लगातार इसके सेवन से मरीज भी इनका आदी हो जाता है। इसका सबसे अधिक नुकसान यह होता है कि एक सीमा तक प्रयोग के बाद एंटीबायोटिक मरीज की आवश्यकता बन जाता है। बिना उसके मर्ज भी ठीक नहीं होता है।