बांदा। बुधवार की शाम से गुरुवार की सुबह तक कभी तेज तो कभी रिमझिम बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेत जलमग्न होने से धान को छोड़कर फसलों के खराब होने के आसार बढ़ गए हैं। मौसम विभाग के अनुसार 12 घंटे में 106 मिली मीटर (एमएम) बारिश दर्ज की गई। पिछले पांच साल में अक्तूबर माह में सर्वाधिक बारिश हुई। हालांकि बारिश के साथ सर्द हवाएं चलने से गर्मी काफूर हो गई।
चित्रकूटधाम मंडल में खरीफ की फसल लगभग तैयार है। तिल, बाजरा, मूंग, उड़द की 75 फीसदी फसल फलफूल रही है। किसानों को उम्मीद थी कि बेहतर उत्पादन होगा, लेकिन बुधवार की पूरी रात हुई तेज व रिमझिम बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार धान के अलावा दलहन व तिलहन की फसल को नुकसान होगा। खेत जलमग्न हो जाने से तिल, बाजरा, मूंग, उड़द की फसल खराब हो सकती है। उधर, अक्तूबर से रबी की बुआई शुरू हो जाती है। जिन किसानों ने बुआई कर ली है, उनके बीज खराब होने का खतरा बढ़ गया है।
पांच साल में अक्तूबर में हुई बारिश
वर्ष बारिश मिमी
2019 82.82
2020 72.94
2021 47.78
2022 106.29
दावा 113 फीसदी हुआ आच्छादन
कृषि विभाग की मानें तो चित्रकूटधाम मंडल में खरीफ के आच्छादन का लक्ष्य 4,16,059 हेक्टेअर था। दावे के अनुसार मंडल में 4,16,586 हेक्टेअर क्षेत्रफल में खरीफ की बुआई और धान की रोपाई की गई है। जो लक्ष्य के सापेक्ष 113 फीसदी है। हमीरपुर में 1,02,892, महोबा में 1,24,512, बांदा में 1,23,083 और चित्रकूट में 66,099 हेक्टेअर क्षेत्रफल में बुआई की गई है।
बारिश से 70 फीसदी नुकसान
जमुनीपुर के किसान शिवदास का कहना है कि खेत में खरीफ की फसल तैयार है। बारिश का पानी खेत में भर गया है। एक-दो दिन आसमान न खुला तो तिल, मूंग, उड़द की फसल सड़ जाएगी। बारिश से फसलों को 70 फीसदी नुकसान है।
रबी की बुआई भी होगी प्रभावित
गुरेह के किसान अहमद का कहना है कि बारिश से फायदा कम और नुकसान ज्यादा है। बारिश का पानी खेतों में भर जाने से धान को फायदा होगा, लेकिन दलहन व तिलहन की फसल को खासा नुकसान है। उधर, रबी की बुआई पर भी असर पड़ा है।
बारिश से खरीफ की फसलों को कोई खास नुकसान नहीं है। आसमान खुल गया है। खेतों का पानी जल्द सूख जाएगा। रबी की बुआई के लिए किसानों को पानी की जरूरत थी, जो पूरी हो गई।-विजय कुमार, उप निदेशक (कृषि)।
संदीप तिवारी