बांदा। अरे! यहां कोई अहीर नहीं है क्या? यहां क्रांति रथ लेकर आए मुलायम सिंह यादव ने भाषण के दौरान हंगामा कर रहे हिंदू संगठनों के लोगों को रोकने के लिए यह ललकार लगाई थी। इसके बाद वरिष्ठ सपा नेताओं के हस्तक्षेप पर मामला शांत हुआ था।
मुलायम सिंह के चहेतों में शुमार शायर व सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष शमीम बांदवी ने बताया कि वर्ष 1987 में मुलायम सिंह यादव जनता दल का क्रांति रथ लेकर बांदा आए थे। रेलवे क्रासिंग से रथ गुजरते समय हिंदू संगठनों ने पथराव कर दिया।
नेताजी (मुलायम सिंह) खामोश रहे और रथ आगे बढ़वा दिया। अलीगंज चौराहे पर उन्होंने माइक संभाला और कार्यकर्ताओं व भीड़ को संबोधित करने लगे। यहां भी हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने हंगामा शुरू कर दिया। इस पर गुस्साए मुलायम सिंह ने माइक पर ही ललकार लगाते हुए कहा कि- अरे! यहां कोई अहीर नहीं है क्या? इसी के बाद वरिष्ठ नेताओं ने हंगामा करने वालों को शांत कर वापस किया।
बांदवी बताते हैं कि नेता जी की वाणी में प्यार झलकता था। वे मुख्यमंत्री रहते हुए तीन बार बांदा आए। बांदा के गांधी के नाम से मशहूर पूर्व मंत्री स्व. जमुना प्रसाद बोस के घर हर बार जरूर गए।
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इतने मुलायम कि शायर को बना दिया जिलाध्यक्ष
मंच पर शायरी के जरिए तारीफ सुनकर मुलायम सिंह यादव ने शायर शमीम बांदवी को जिले की सियासत की ऊंचाई तक पहुंचा दिया। बांदवी ने बताया कि वर्ष 1999 में हल्ला बोल रैली में उन्होंने गीत सुनाया- ‘इंसाफ पसंद मुलायम आए हैं, ले के खुशियों का खजाना मुलायम आए हैं, तो मुलायम सिंह ने उनका हाथ पकड़ा और कहा कि शमीम तुम तो बेहतरीन हो। इसके बाद हर सभा में उनसे गीत सुनने लगे। उन्हीं की बदौलत वह वर्ष 2011 में जिलाध्यक्ष बने। 16 नवंबर 2008 को हुई बेटी सुकइया की शादी का पूरा खर्च नेताजी (मुलायम) ने उठाया था। यहां उनकी आखिरी जनसभा वर्ष 2011 में राइफल क्लब में हुई। वह विधानसभा प्रत्याशी अमिता वाजपेयी के प्रचार में आए थे।
प्रेस क्लब का किया था लोकार्पण
मुख्यमंत्री के रूप में मुलायम सिंह यादव 9 सितंबर 2005 को यहां आए और नवनिर्मित प्रेस क्लब भवन का लोकार्पण किया था। प्रेस क्लब को स्व. सुरेशचंद्र गुप्ता मेमोरियल का नाम दिया और उनके चित्र पर माल्यार्पण किया।