पांच दशक से चल रही बांदा-खप्टिहा रोडवेज बस पर ‘ब्रेक लग’ गया। मकर संक्रांति पर ठंड में गाड़ी का इंतजार करते यात्री परेशान रहे। वजह बताई गई कि कम से कम 25 यात्री होने पर ही बस चलाई जा सकेगी।
खप्टिहा कलां करीब 10 हजार की आबादी का गांव है। दर्जनों पुरवे और मजरे हैं। बांदा से खप्टिहा के लिए वाया सांड़ी होकर रोडवेज बस पिछले करीब 50 वर्षों से चलाई जा रही थी। बृहस्पतिवार मकर संक्रांति से इसे अचानक बंद कर दिया गया।
इस रूट के बस चालक अजीज खां ने यात्रियों के सवाल पर बताया कि निगम के प्रबंध निदेशक का आदेश है कि कम यात्री होने पर बस नहीं चलाई जाएगी। उधर, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक महेश कुमार का कहना है कि कम से कम 25 यात्री होने पर ही बस चलाई जाएगी।
उधर बस सेवा बंद होने से खप्टिहा समेत अलोना, सांड़ी, खैरेई, उसरा, बेरी बैजेमऊ, भुलसी इत्यादि करीब एक दर्जन गांवों के यात्रियों को जिला मुख्यालय तक जाने के लिए खासी मुसीबत हो गई।
क्षेत्र के बाबूलाल गुप्त, सुनील लाला, अशोक द्विवेदी, राजा मगरौठिया, राजू शिवहरे, साजन यादव, आत्म स्वरूप विश्वकर्मा, मैना देवी निषाद, मुश्ताक खां आदि ने बस बंद किए जाने पर कड़ा रोष जताते हुए चेतावनी दी है कि यह शीघ्र शुरू न हुई तो आंदोलन छेड़ा जाएगा।