पीडब्ल्यूडी में अभिलेखों की जांच करते महालेखा विभाग टीम।
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बांदा। लोक निर्माण विभाग में करोड़ों रुपये के घोटाले की जांच शुरू हो गई है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) दिल्ली की छह सदस्यीय स्पेशल टीम मुख्यालय आ गई। बुधवार को टीम ने कई विभागीय अधिकारियों और लेखाधिकारी के बयान दर्ज किए। दस्तावेजों का परीक्षण भी किया। टीम सात दिन रहकर जांच करेंगी।
लोक निर्माण विभाग में करोड़ों रुपये के राजस्व क्षति और ठेकेदारों से अवैध वसूली का मामला गर्माया हुआ। विभिन्न संगठन जांच की मांग के लिए आंदोलित है। बुंदेलखंड इंसाफ सेना करीब 20 दिन से अशोक लाट कचहरी तिराहे पर अनशन कर रही है।
उधर, पिछले दिनों अधिशासी अधिकारी ने आईजीआरएस की शिकायत का जवाब देते हुए घोटाले के लिए लेखाधिकारी को दोषी माना था। एक्सईएन की रिपोर्ट और समाजसेवियों की मांग पर महालेखाकर के आदेश पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी ) दिल्ली की एक छह सदस्यीय स्पेशल टीम मुख्यालय आ गई है।
टीम ने विभागीय अधिकारियों सहित लेखाधिकारी के बयान दर्ज किए। दस्तावेजों का परीक्षण किया। टीम के एक सदस्य ने बताया कि जांच का काम सात दिन तक चलेगा। पत्रावलियों में अभी तक ऐसा कुछ नहीं मिला है, जिसमें भ्रष्टाचार प्रमाणित हो।
पिछले एक साल में किए गए भुगतान का परीक्षण किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर भौतिक सत्यापन भी किया जाएगा। अधीक्षण अभियंता सुरेंद्र कुमार का कहना है कि लेखाकार विभाग की टीम पत्रावलियों का परीक्षण कर रही है। जल्द सही स्थिति सामने आएगी।