बांदा। पैसेंजर ट्रेनों के यात्रियों से रेलवे एक्सप्रेस ट्रेनों के बराबर किराया वसूल रहा है। ज्यादा किराया देने के बाद भी सुविधाएं नहीं मिल रहीं हैं। यात्रा में समय भी ज्यादा लग रहा है।
कोरोना महामारी के समय रेलवे ने ट्रेनों में भीड़भाड़ रोकने के लिए एक्सप्रेस ट्रेनों को स्पेशल और पैसेंजर ट्रेनों को एक्सप्रेस बना दिया था। इनका किराया बढ़ाकर स्टापेज कम कर दिए थे। कोरोना कम होने के बाद स्पेशल ट्रेनें सामान्य हो गईं, किराया भी इनका कम कर दिया गया, लेकिन पैसेंजर ट्रेनों का किराया कम करने के लिए रेलवे तैयार नहीं है।
यात्रियों को बांदा से कानपुर का पैसेंजर ट्रेन का किराया 28 रुपये की जगह 65 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। झांसी का किराया पहले 32 रुपये था, अब 69 रुपये लिए जा रहे हैं। बांदा से प्रतिदिन पैसेंजर ट्रेनों में कानपुर, झांसी, इलाहाबाद के लिए एक हजार से अधिक यात्री सफर करते है। इनसे रोजाना हजारों रुपये अतिरिक्त किराया वसूला जा रहा है।
यात्री रमाकांत का कहना है कि जब किराया एक्सप्रेस का लग रहा है तो क्यों न एक्सप्रेस ट्रेनों से यात्रा की जाए। इससे समय की बचत होगी। शशांक का कहना है कि पैसेंजर ट्रेनों में ज्यादातर गरीब व मध्यम वर्ग के लोग सफर करते हैं। यात्री दो साल से दोगुना किराया चुका रहे हैं।
जिला अधिकवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष अशोक कुमार जीतू ने प्रधानमंत्री व रेलमंत्री को पत्र भेजकर पैसेंजर ट्रेनों का किराया पहले की तरह करने की मांग की है। रेलवे के जन संपर्क अधिकारी, झांसी मनोज कुमार का कहना है कि कोरोना की स्थिति सामान्य होने के बाद रेलवे की कई व्यवस्थाएं सामान्य हुई हैं। पैसेंजर ट्रेनों को सामान्य तरीके से चलाने पर भी चर्चा हो रही है। जल्द निर्णय हो सकता है।