परिवहन विभाग के आसपास दलालों का अड्डा।
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बांदा। परिवहन विभाग में अधिकांश सेवाएं ऑनलाइन हो गई हैं, इसके बावजूद दलालों से मुक्ति नहीं मिली। ड्राइविंग लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन से लेकर नवीनीकरण समेत विभिन्न काम दलालों के जरिये हो रहे हैं। आलम यह है कि निर्धारित शुल्क से कई गुना पैसा वसूला जा रहा है। लर्निंग व स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस का शुल्क 1350 रुपये है, लेकिन दलाल 4800 रुपये तक वसूल रहे हैं।
शहर से लगभग चार किमी दूर बबेरू रोड पर किराए के भवन में परिवहन विभाग कार्यालय चल रहा है। इसके इर्द-गिर्द 50 से अधिक दलालों ने अपना अड्डा बना रखा हैं। बाहर से लेकर दफ्तर के अंदर हरेक पटल में इनका दखल है। आम आदमी काम के लिए भटकता रहता है और दलालों के इशारों पर सारे काम हो जाते हैं। लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस के लिए 350 रुपये और परमानेंट (स्थायी) लाइसेंस के लिए 1000 रुपये निर्धारित हैं।
ऑनलाइन आवेदन होता है। फिर टेस्ट व ड्राइविंग टेस्ट देना होता है, लेकिन नियमों के आधार पर सरलता से काम नहीं होता है। विभाग में दलाल यह काम सिर्फ 4000 से 4800 रुपये लेकर आसानी से करा देते हैं। आवेदक को ड्राइविंग और आनलाइन टेस्ट भी नहीं देना होता है। जिम्मेदारों की अनदेखी और दलाली के ‘खेल’ में आम नागरिक ठगे जा रहे हैं।
बगैर छुट्टी के दो माह से नदारद लिपिक को आरटीओ ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। आरटीओ एसडी सिंह ने बताया कि लिपिक मधुकर बिना किसी सूचना के छुट्टी पर चले गए। दो माह से लापता रहे। किसी भी सक्षम अधिकारी से भी संपर्क नहीं किया। लापरवाह पूर्ण कार्यशैली पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।
आनलाइन प्रक्रिया से दलाली प्रवृत्ति पर काफी कमी आई है। विभाग के आसपास दलालों के जमघट पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है। चारों जिलों के एआरटीओ को भी निर्देश दिए गए हैं कि कोई दलाल गरीब जनता की मजबूरी का फायदा न उठा पाएं। शिकायत मिली तो संबंधित दलाल के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराएंगे। -एसडी सिंह, संभागीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ), बांदा।