बांदा। चित्रकूटधाम मंडल के रोडवेज डिपो की खराब 88 बसों में 24 बसें मरम्मत के बाद ठीक तो हो गई हैं, लेकिन इन्हें चलाने वाला कोई नहीं है। इस कारण 13 बसें ही सड़क पर उतर पाई हैं, 11 बसें ड्राइवर और कंडक्टर के इंतजार में खड़ी हैं। मजबूरी में यात्रियों को अधिक पैसा देकर प्राइवेट बसों और डग्गामार वाहनों में जोखिम भरा सफर करना पड़ है। परिवहन निगम को भी राजस्व का नुकसान हो रहा है।
चित्रकूटधाम मंडल के बेड़े में 399 बसें हैं। चार दिन पहले तक मंडलीय वर्कशाप और डिपो स्तर 88 बसें खराब थीं। इस कारण खप्टिहा और कालिंजर मार्ग पर बसों का संचालन बंद हो गया था। कई मार्गों पर बसों की संख्या घट गई थी। इससे यात्रियों को खासी दिक्कतें हो रही हैं। अमर उजाला ने यात्रियों की इस समस्या को प्रमुखता से आठ, 10 और 12 अक्तूबर को प्रकाशित किया।
इस पर अधिकारियों और कर्मचारियों ने दिन-रात मशक्कत के बाद छोटी खामियों से खड़ीं 24 बसों को ठीक कर दिया। बसें तो ठीक हो गईं पर इन्हें मार्ग पर ले जाने वाला कोई नहीं है। इसकी वजह ड्राइवरों और कंडक्टरों की कमी बताई जा रही है। फोरमैन धर्मेद्र सचान ने बताया बसों का खराब होना समस्या नहीं है, बल्कि बसों को चलाने के लिए निगम के पास कंडक्टर और ड्राइवर नहीं हैं। यह समस्या है। ठीक 24 बसों में 13 बसें ही मार्ग पर भेजी गई हैं। 11 बसें अभी भी कंडक्टर और ड्राइवर की कमी से खड़ी हैं।
मंडल में ड्राइवर व कंडक्टरों की स्थिति
चित्रकूटधाम मंडल में 399 बसें हैं। प्रत्येक बस में दो ड्राइवरों और दो कंडक्टरों का मानक है। लंबी दूरी की बसों में तीन-तीन रखे जाते हैं। इस प्रकार मंडल में कंडक्टरों की जरूरत 862 है, लेकिन मौजूदा समय में 524 संविदा और 88 नियमित कंडक्टर हैं, यानी 250 कंडक्टर कम हैं। इसी प्रकार मंडल में 862 ड्राइवरों में 611 संविदा और 131 नियमित हैं, यानी 120 ड्राइवर कम हैं।
जेम पोर्टल से होगी कंडक्टरों की भर्ती
सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक गौतम कुमार का कहना है कि कंडक्टरों और ड्राइवरों की कमी को पूरा करने के लिए चालकों का नियमित टेस्ट हो रहा है। कंडक्टरों की भर्ती जेम पोर्टल के माध्यम से करने के लिए सर्विस कंपनी के चयन की कार्रवाई की जा रही है। बुधवार को वर्कशाप में ठीक होने वाली 13 बसों को कानुपर, फतेहपुर, हमरपुर, कालिजर, कर्वी, महोबा, लखनऊ मार्ग पर भेजा गया
है।
26 कंडक्टर और ड्राइवर अन्य कार्यों में लगे
एक तरफ मंडल में ड्राइवरों व कंडक्टरों की कमी है, दूसरी तरफ 16 ड्राइवर क्रेन, स्टोर ट्रक, इंटर सेप्टर सचल दल आदि गाड़ियों में लगे हैं। इसी प्रकार 10 कंडक्टर आरएम व एआरएम कार्यालय में आफिस वर्क का कार्य कर रहे हैं।
बेड़े की पांच फीसदी बसें खराब होती रहती हैं। मौजूदा समय में बेड़े में 50 फीसदी बसें जर्जर हैं। ऐसे में ज्यादा बसें खराब हो रही हैं, लेकिन नियमित बसें ठीक हो रही हैं। कंडक्टर व ड्राइवर न होने से उन्हें चलाने वाला कोई नहीं है। -विजय कुमार सिंह, स्टेशन प्रबंधक, चित्रकूटधाम मंडल, बांदा।