बांदा। हिंदी दिवस समारोह के उपलक्ष्य में राजकीय महिला महाविद्यालय में मंडलायुक्त आरपी सिंह ने कहा कि हिंदी राष्ट्रीय एकता और अखंडता का सेतु है। उसे मजबूत बनाए रखना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने हिंदी के साथ अन्य भाषाओं से सामंजस्य की बात रेखाकिंत करते हुए इस बात पर बल दिया कि भले हम अग्रेंजी में ज्ञान प्राप्त करें। लेकिन हमारा दिल हिंदी वाला होना चाहिए।
उन्होंने यहां मेधा मिश्रा और प्रियांशी रैकवार को चंद्रपाल कश्यप स्मृति कविता सम्मान-2022 प्रदान किया। हिंदी के वरिष्ठ कवि नरेंद्र पुंडरीक ने अपनी कविताओं के माध्यम से कवि समाज में भूमिका को रेखांकित किया। डीसीडीएफ अध्यक्ष सुधीर ङ्क्षसह ने हिंदी के वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों और संभावनाओं को रेखांकित किया।
सीआरपीएफ में असिस्टेंट कमांडेंट विकास कुमार सिंह ने अपनी कविताएं और विचार साझा किए। प्राचार्य डॉ. दीपाली गुप्ता ने कहा कि हिंदी भारतीय जनमानस की भाषा है। सहायक प्रोफेसर डॉ. अंकिता तिवारी ने हिंदी को किसान, मजदूर और संघर्षशील चेतना की भाषा कहा।
संचालन हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. शशिभूषण मिश्र ने स्वतंत्रता आंदोलन में हिंदी भाषा और साहित्य में योगदान को उल्लेखनीय बताया। रामनरेश त्रिपाठी ने कविता पाठ किया। इस अवसर पर डॉ. सबीहा रहमानी, डॉ. जितेंद्र कुमार, डॉ. जय कुमार चौरसिया, डॉ. माया वर्मा, डॉ. जयप्रकाश सिंह, डॉ. सपना सिंह, डॉ. ज्योति मिश्रा, डॉ. विनोद सिंह चंदेल, डॉ. मोहम्मद अफजल, डॉ. सुधा तिवारी, डॉ. अस्तुति वर्मा, डॉ. नीतू सिंह आदि शिक्षक मौजूद रहे।
Banda: Bridge of Hindi National Unity and Integrity- फोटो : BANDA