बांदा। मरका में नाव हादसे के बाद 12 साल से निर्माणाधीन पुल के निर्माण में तेजी आ गई है। वहीं, राजनीति भी शुरू हो गई है। डीएम के निरीक्षण कि बाद अधूरे पुल को पूरा करने के लिए अब मजदूरों की संख्या दोगुना कर दी गई।
मरका घाट में यमुना नदी पर निर्माणाधीन पक्का पुल बांदा और फतेहपुर को जोड़ेगा। दोनों जनपदों के सीमावर्ती गांवों के करीब 1200 ग्रामीण रोजाना नाव से आवागमन करते हैं। आम लोगों की दिक्कतों के मद्देनजर वर्ष 2011 में तत्कालीन बसपा सरकार में मरका और इसके पड़ोस में औगासी घाटों पर पक्के पुल के निर्माण की मंजूरी दी गई थी। तत्कालीन पीडब्ल्यूडी मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने शिलान्यास किया था। बसपा सरकार जाने के बाद बजट अटकने से निर्माण कार्य सुस्त हो गया।
सपा सरकार में भी इसे बहुत ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया गया। मौजूदा भाजपा सरकार को भी छह साल से ज्यादा बीत गए, पर निर्माण पूरा नहीं हो पाया। इस लेटलतीफी से पुल की लागत करीब तीन गुना बढ़ गई है। कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश सेतु निर्माण निगम ने संशोधित बजट अनुमोदित कराया।
हाल ही में मरका घाट में नाव पलटने से 13 लोगों की मौत के बाद पुल का मुद्दा भी गरमा गया है। शिलान्यास करने वाले पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधा, कहा कि और कितनी जान जाने का उसे इंतजार है? उधर, स्थानीय सपा विधायक विशंभर सिंह यादव और सपा के पूर्व मंत्री विशंभर निषाद आदि ने भी प्रदेश सरकार को घेरा है।