बांदा। बच्चों में डिप्थीरिया संक्रमण का प्रकोप चल रहा है। खप्टिहा कलां गांव की पांच वर्षीय आयशा को बुखार और गले में शिकायत होने पर रविवार को भर्ती कराया गया।
बुधवार को डॉक्टरों ने डिप्थीरिया के लक्षण देख उसे डिप्थीरिया वार्ड में भर्ती कराया। इसे मिलाकर अब डिप्थीरिया वार्ड में भर्ती बच्चों की संख्या चार हो गई है। बुखार से पीड़ित 12 बच्चों को चिल्ड्रेन वार्ड और ट्रामा सेंटर में बने वार्ड में भर्ती किया गया है।
जिला अस्पताल की ओपीडी में बाल रोग विशेषज्ञ के कक्ष में बच्चों की भीड़ रही। बुधवार को 150 बच्चा का इलाज किया गया। इसमें ज्यादातर बुखार के मरीज थे। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कि चार-छह दिन में एक-दो मरीजों में डिप्थीरिया के लक्षण मिलते हैं।
उन्हें अलग वार्ड में शिफ्ट किया जा जाता है। वायरल, उल्टी-दस्त, पीलिया आदि से पीड़ित बच्चे देखे गए। ट्रॉमा सेंटर में भी बुखार से ग्रसित बच्चों का इलाज किया गया।
डिप्थीरिया बैक्टीरिया जनित बीमारी
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कि डिप्थीरिया बैक्टीरिया जनित बीमारी है। रोगी के खांसने, छींकने के दौरान एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक यह फैलती है।
इस बीमारी में तेज बुखार, गले में खराश, सूजन, भोजन निगलने में व सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। इससे बचाव के लिए बच्चों को डिप्थीरिया के तीन टीके डेढ़, ढाई और साढ़े तीन महीने में लगते हैं। इसके बाद डेढ़ साल व पांच साल में बूस्टर डोज लगवानी चाहिए।