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बजट में बुंदेलखंड की झोली रही खाली

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टीवी पर बजट देखते लोग। - फोटो : BANDA
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बांदा। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण विधानसभा चुनाव वाले राज्यों पर पूरी तरह नरम रहीं। उनके बजट में एक करोड़ से ज्यादा आबादी वाले बुंदेलखंड को अलग से कुछ भी खास नहीं मिला। अर्थशास्त्रियों की नजर में बजट आम लोगों के लिए कुछ खास मुफीद नहीं है। बेरोजगारी में कमी के आसार नहीं हैं।
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प्रमुख सराफा व्यवसायियों का कहना है कि ढाई फीसदी टैक्स की कमी तो ठीक है, लेकिन लोगों के पास पैसा होगा तभी सोना-चांदी खरीदेंगे। सत्तारूढ़ दल के जनप्रतिनिधियों और नेताओं ने बजट को सराहा है।
विपक्ष विधान सभा चुनाव का चुनावी बजट बता रहा है। आम लोगों में भी फिलहाल बजट को लेकर कोई खास उत्साह नजर नहीं आ रहा। बुंदेलखंड के लिए कोई नई ट्रेन या नेशनल हाईवे, एक्सप्रेस-वे इत्यादि का भी प्राविधान नहीं किया गया है।
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कोरोना की मार खाए आयकर दाता निराश
पंडित जेएन डिग्री कालेज शिक्षक संघ अध्यक्ष डा. रोहित सिंह ने कहा कि बजट में मध्यम वर्ग को कुछ नहीं मिला। किसानों की सम्मान राशि में भी वृद्धि नहीं की गई। इलेक्ट्रानिक सामान और सोलर उपकरण महंगे कर दिए गए हैं।
उधर, कन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के बुंदेलखंड संयोजक मयंक गुप्ता सराफ ने कहा कि कोरोना से जूझ रहे कर दाताओं और व्यापारियों को अबकी उम्मीद थी कि आयकर छूट सीमा ढाई लाख से बढ़ाकर पांच लाख की जाएगी, लेकिन निराशा हाथ लगी है। ईंधन में अतिरिक्त टैक्स लगाकर सरकार ने महंगाई की आग में घी डाला है।
इलेक्ट्रानिक्स, कार और मोबाइल पर भी टैक्स बढ़ाया है। कहा कि राजकोषीय घाटा 9.5 फीसदी पहुंचने पर अर्थ व्यवस्था गड़बड़ा सकती है। भाजपा और बार एसोसिएशन पूर्व अध्यक्ष अशोक त्रिपाठी जीतू ने बजट को महंगाई रोकने वाला बताया। कहा कि किसानों की आय बढ़ेगी। रोजगार के अवसर मिलेंगे। कहा कि बंद ट्रेनों को फिर शुरू किया जाना चाहिए। किराया पूर्व जैसा बहाल हो।
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