बांदा। जिला पंचायत की पारी शुरू होते ही अध्यक्ष और सदस्यों के बीच पाला खिंच गया। बजट आवंटन को लेकर वही सदस्य अध्यक्ष के खिलाफ खड़े हो गए, जिन्होंने कुछ दिन पहले वोट देकर उन्हें चुना है।
शनिवार को बोर्ड की बैठक में यह मतभेद खुलकर सामने आ गया। अध्यक्ष बैठक में आईं ही नहीं। अधिकांश सदस्यों ने कड़ा विरोध जताते हुए बैठक में ही मुख्य विकास अधिकारी को पत्र सौंपकर हाल ही में किए गए टेंडर निरस्त करने की मांग की।
शनिवार को बजट इत्यादि पर चर्चा और स्वीकृति के लिए बैठक बुलाई गई थी। सांसद भैरो प्रसाद मिश्र और विधायक विशंभर सिंह यादव सहित लगभग सभी सदस्य उपस्थित थे। लगभग डेढ़ घंटा इंतजार के बाद भी अध्यक्ष निर्मला सिंह नहीं आईं। उनकी कुर्सी खाली रही। इसी बीच अपर मुख्य अधिकारी डॉ. पीके मिश्रा ने कहा कि अध्यक्ष अस्वस्थ हैं। इस वजह से बैठक में नहीं आ सकतीं। लिहाजा बैठक स्थगित की जाती है।
यह सुनते ही तमाम सदस्य अपने स्थान पर खड़े हो गए और हंगामा शुरू कर दिया। सदस्य दीपा सिंह गौर ने कहा कि उन्होंने 40 लाख के प्रस्ताव दिए थे, लेकिन सिर्फ 10 लाख के कार्य स्वीकृत हुए हैं। यही आरोप सदस्य गीता सिंह ने भी लगाया। सदस्य अरुण सिंह ने कहा कि बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव कुछ होता है और बजट कुछ जारी होता है।
सांसद और विधायक ने भी नाराजगी और आपत्ति जताई। सदस्यों ने अध्यक्ष और अपर मुख्य अधिकारी पर मनमानी के आरोप लगाए। कहा कि हाल ही में जिला पंचायत में 6.47 करोड़ रुपये के टेंडर कराए हैं।
इसमें अन्य सदस्यों के क्षेत्र में मात्र 10-10 लाख रुपये के कार्य शामिल किए गए हैं, जबकि एक विधायक के क्षेत्र को 2.36 करोड़ रुपये के कार्य आवंटित हुए हैं। सदस्यों ने सीडीओ से लिखित मांग की कि टेंडर निरस्त कराए जाएं। बैठक में सीडीओ आरके सिंह, वित्तीय परामर्शदाता वीके तिवारी सहित सदस्य उपस्थित रहे।
जिला पंचायत बोर्ड की बैठक में हंगामे और अध्यक्ष पर लगे आरोपों की बाबत अध्यक्ष निर्मला सिंह के प्रतिनिधि लाखन सिंह (पारा) ने कहा कि अध्यक्ष की अचानक तबियत गड़बड़ हो गई। इसी वजह से मीटिंग में नहीं जा सकीं। 31 मार्च को पुन: मीटिंग बुलाई जाएगी। सदस्यों को जो भी पक्ष रखना है, बैठक में रखें। उनकी बात को पूरी गंभीरता से सुना जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी के साथ बजट में कोई पक्षपात नहीं किया गया है। अब किसी को राजनीति ही करना है तो बात अलग है।