बांदा। प्रदेश में हर साल सैकड़ों मीट्रिक टन अनाज सरकारी गोदामों में सड़कर बर्बाद हो रहा है और नत्थू जैसे तमाम लोग भूखे पेट मौत के मुंह में समा रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि पिछले पांच साल में यूपी में भारतीय खाद्य निगम के गोदामों में 1823 मीट्रिक टन से ज्यादा अनाज सड़ गया। वर्ष 2015-16 में 116.68 मीट्रिक टन गेहूं चावल सड़ चुका है।
पूरे देश में एफसीआई के गोदामों में पिछले पांच साल में बर्बाद हुए राशन की मात्रा 53144.815 मीट्रिक टन है। भारतीय खाद्य निगम ने राशन की इस बर्बादी को खुद स्वीकारते हुए जन सूचना अधिकार अधिनियम में जानकारी दी है।
सूखे और अन्य दैवी आपदाओं के चलते बुंदेलखंड में पिछले कई साल से हजारों परिवार फाकाकशी के दौर से गुजर रहे हैं। यह भी देखा गया कि आत्महत्या करने वाले तमाम किसान और मजदूरों के घरों में मुट्ठी भर दाना नहीं मिला।
ऐसे हालात के बीच भारतीय खाद्य निगम के गोदामों में हर साल भारी मात्रा में गेहूं और चावल सड़-गल कर या अन्य कारणों से बर्बाद हो रहा है, जबकि इसी अनाज से गरीबों का पेट भर सकता था। अनाज बर्बादी के आंकड़े निगम ने खुद दिए हैं।
जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) मुख्यालय, नई दिल्ली के उप महा प्रबंधक केके बरुआ द्वारा दी गई सूचना में वर्ष 2011-12 से 2015-16 तक राशन बर्बादी (डैमेज) के आंकड़े दिए गए हैं। यह सूचना बांदा निवासी आरटीआई एक्टिविस्ट कुलदीप शुक्ला ने मांगी थी। सूचना से यह भी खुलासा हुआ कि पिछले पांच साल में पूरे देश में 53144.815 मीट्रिक टन गेहूं और चावल एफसीआई के गोदामों में बर्बाद हो गया।