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Banda News: मंजूरी भी रेडियोलॉजिस्ट भी...एमआरआई मशीन नहीं मिली

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फोटो- 06रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज। संवाद
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-मंडल के रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में मशीन न होने से निजी डायग्नोस्टिक सेंटर मालामाल
-प्रतिदिन रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में मंडल के चारों जिलों से आते हैं 300 से 400 मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
बांदा। चित्रकूटधाम मंडल के दो प्रमुख सरकारी अस्पतालों, रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल में एमआरआई (मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग) जैसी महत्वपूर्ण जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं है। शासन से मंजूरी मिलने के बावजूद मशीन की अनुपलब्धता के कारण मरीज एक रुपये के पर्चे पर इस जांच का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। इसके बजाय, उन्हें निजी डायग्नोस्टिक सेंटर की ओर रुख करना पड़ रहा है, जहां जांच की फीस काफी अधिक है।

वर्तमान में, चित्रकूटधाम मंडल के किसी भी सरकारी अस्पताल में यह सुविधा नहीं होने से मरीजों को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बांदा में एक निजी डायग्नोस्टिक सेंटर में एमआरआई की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन वहां विभिन्न अंगों की जांच के लिए अलग-अलग और महंगी फीस निर्धारित है, जो आम आदमी की पहुंच से बाहर है। इस स्थिति के कारण मरीजों को अनावश्यक आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है और उनके उपचार में देरी हो रही है।
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कोविड-19 महामारी के बाद, रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज, बांदा में एमआरआई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। जिसे स्वीकृत भी कर लिया गया है। मेडिकल कॉलेज में इस मशीन को संचालित करने के लिए रेडियोलॉजिस्ट भी मौजूद हैं। हालांकि, मशीन की खरीद और स्थापना में देरी के कारण यह सुविधा अभी तक शुरू नहीं हो सकी है।

रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन चारों जिलों से औसतन 300 से 400 मरीज इलाज के लिए आते हैं। इनमें से लगभग 50 से 60 गंभीर मरीजों को डॉक्टरों द्वारा एमआरआई जांच कराने की सलाह दी जाती है। सुविधा के अभाव में इन मरीजों को निजी अस्पतालों के महंगे विकल्पों का सहारा लेना पड़ता है।

एमआरआई जांच की उपयोगिता
एमआरआई एक उन्नत चिकित्सा इमेजिंग तकनीक है जो शरीर के आंतरिक अंगों, नरम ऊतकों, हड्डियों और तंत्रिका तंत्र की विस्तृत छवियां प्रदान करती है। इस तकनीक का उपयोग ट्यूमर, स्ट्रोक, चोटों और अन्य विकारों के निदान में किया जाता है। डॉक्टरों के अनुसार, एमआरआई को सीटी स्कैन की तुलना में अधिक सुरक्षित माना जाता है क्योंकि इसमें एक्स-रे रेडिएशन का उपयोग नहीं होता है। यह तकनीक विशेष रूप से मस्तिष्क ट्यूमर, स्ट्रोक, रीढ़ की हड्डी की समस्याओं, चोटों, संक्रमणों और विभिन्न न्यूरोलॉजिकल विकारों के सटीक निदान के लिए अत्यंत उपयोगी है।
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निजी केंद्रों पर एमआरआई जांच की फीस
जांच का अंग
अनुमानित फीस (रुपये)
मस्तिष्क
2,000 से 5,000

घुटने या रीढ़
2,500 से 10,000

पेट
4,500 से 14,000

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वर्जन
जिम्मेदार बोले-शासन को दे बार लिखा जा चुका पत्र
कोविड काल के बाद रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज से एमआरआई के लिए प्रस्ताव भेजा गया था। शासन से भी यह प्रस्ताव स्वीकृत है, लेकिन अब तक एमआरआई मशीन न मिलने से यह सुविधा मेडिकल कॉलेज में आने वाले मरीजों को नहीं मिल पा रही है। इसके अलावा मंडल के किसी भी सरकारी अस्पताल में यह सुविधा न होने से लोग प्राइवेट में जांच कराते हैं। मेडिकल कॉलेज दो बार शासन को लिखा पढ़ी कर चुका है। -डॉ. सुनील कौशल, प्रधानाचार्य, रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज, बांदा
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