अन्ना पशुओं पर अंकुश लगाने के लिए अब एक और कदम उठाया जा रहा है। गांवों में पुलिस के चौकीदार अन्ना पशुओं के मालिकों की सूची तैयार करेंगे। उन्हें पशु क्रूरता अधिनियम 1960 के तहत नोटिस जारी की जाएगी। हर गांव में 100 से 150 पशु क्षमता का 14वें वित्त आयोग से पशुबाड़ा बनेगा। पशुओं का रजिस्ट्रेशन और भरण-पोषण की व्यवस्था गांव में गठित कमेटियां करेंगी।
यह निर्णय रविवार को कलक्ट्रेट सभागार में आयोजित अन्ना प्रथा उन्मूलन संबंधी बैठक में लिए गए। सांसद भैरो प्रसाद मिश्र ने कहा कि अन्ना पशुओं से रबी की फसल बचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। तार के पशुबाड़े बनाए जाएं। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने जिले में 8 पशु आश्रय स्थल बनाए हैं। इसके अलावा पांच निर्माणाधीन हैं। जिला पंचायत की बैठक में पशुबाड़े के लिए जाली लगाने का सुझाव आया था। इसका एस्टीमेट तैयार करने के लिए निर्देश दिए गए हैं। विधायक प्रकाश द्विवेदी ने कहा कि अन्ना पशु छोड़ने वालों पर धारा 107, 116 की कार्रवाई की जाए। विधायक राजकरन कबीर ने कहा कि अन्ना पशु मालिकों को चिह्नित कर उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाए।
बैठक की अध्यक्षता कर रहे डीएम हीरालाल ने कहा कि दिवाली के बाद गांवों में एसडीएम बैठकें करके कमेटी का गठन करेंगे और पशु मालिकों को अन्ना जानवर न छोड़ने के लिए आगाह किया जाएगा। ग्रामीणों से भी सहयोग मांगा जाएगा। इसके बाद भी जानवर छोड़ा तो पशु मालिक के विरुद्ध कार्रवाई होगी। प्रधान, सचिव, लेखपाल, चौकीदार सभी का सहयोग लिया जाएगा।
पुलिस अधीक्षक एस आनंद ने कहा कि जनपद के बाशिंदे इस गंभीर संकट के हल में सहयोग करें। उन्होंने खबरदार किया कि अन्ना पशु छोड़ने वालों के विरुद्ध पुलिस अपनी कार्रवाई करेगी। सीडीओ हीरालाल ने गाय पालन करके गोमूत्र, गोबर से कीटनाशक आदि बनाने की सलाह दी। बैठक में एडीएम संतोष बहादुर सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट प्रदीप कुमार सिंह, सभी एसडीएम, सीएमओ, उप कृषि निदेशक, तहसीलदार, ग्राम प्रधान, एनजीओ, अधिकारी आदि शामिल रहे।