कस्बा सहित आसपास के एक दर्जन गांवों में रात में अन्ना मवेशियों ने खेतों में धावा बोलकर सैकड़ों बीघा फसल सफाचट कर दी। इससे किसान आक्रोशित हैं।
रोष जताया कि गांवों को अन्ना मुक्त करने का ढिंढोरा पीट रहे अफसर सुध नहीं ले रहे। 17 गांवों व 24 मजरों में कहीं भी स्थायी व अस्थायी गोशाला नहीं है।
प्रदेश सरकार अन्ना मवेशियों से निजात के लिए तमाम योजनाएं चला रही है। करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाया जा रहा है। फिर भी इस पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।
नरैनी तहसील क्षेत्र में कस्बा सहित बाबूपुर, महाराजपुर, रगौली, नहरी, बिल्हरका, निढुवा, बडै़छा, मानपुर, अकेलवा आदि गांवों में अन्ना मवेशियों से संकट गहरा गया है। यहां दर्जनों मवेशियों के झुंड घूम रहे हैं और खेतों में धावा बोलकर फसलों को सफाचट कर रहे हैं। उनके पैरों तले रौंदने से भी फसलें बर्बाद हो रही हैं।
किसान रामेश्वर, कल्लू, भोला, अमर, सिद्धा, राकेश, जमुना, बिल्लू, कल्लन आदि ने बताया कि रात-दिन निगरानी के बाद भी अन्ना मवेशियों से फसलों को नहीं बचा पा रहे हैं। रात में मवेशी जिस खेत में घुस जाते हैं, वहां तहस-नहस कर देते हैं।
रोष जताया कि अस्थायी व स्थायी गोशाला न होने से इन पर रोक नहीं लग पा रही। कई बार अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन किसी ने तवज्जो नहीं दी। नतीजतन अन्ना मवेशियों की धमाचौकड़ी से किसान अपनी फसलों से हाथ धो रहे हैं। किसानों ने ग्राम पंचायत स्तर पर गोशाला बनवाने की मांग की है।