Animal disease lab could not be started in the division
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बांदा। पशुओं के मर्ज का पता लगाने के लिए चित्रकूटधाम मंडल में करीब डेढ़ करोड़ की लागत से बनाई गई चार पशु रोग निदान प्रयोगशालाएं ढाई वर्ष बाद भी चालू नहीं हो सकीं। इनके लिए न तो स्टाफ की व्यवस्था हुई और न संसाधनों का इंतजाम। पशु चिकित्सक अंधेरे में तीर चलाने की तर्ज पर पशुओं का इलाज कर रहे हैं। प्रत्येक प्रयोगशाला की लागत 35.73 लाख रुपये है। मंडल के किसी जिले में पशु निरोग प्रयोगशाला नहीं है।
प्रदेश सरकार ने वर्ष 2015-16 में पशुओं के रोग निदान के लिए चित्रकूटधाम मंडल के चारों जिलों में एक-एक पशु रोग निदान प्रयोगशाला को स्वीकृति प्रदान की थी। इनके भवन मार्च 2017 में बनकर तैयार होने के बाद पशुपालन विभाग को हस्तांतरित कर दिए गए थे। ढाई वर्ष बाद भी प्रयोगशालाओं में स्टाफ और संसाधनों की व्यवस्था नहीं की गई।
प्रयोगशालाओं में ताले लटक रहे हैं। मंडल में कहीं भी पशुओं के रोगों की जांच के लिए प्रयोगशाला न होने से चिकित्सक सिर्फ लक्षण और अनुमान के सहारे पशुओं का इलाज कर रहे हैं। पशु चिकित्सकों का कहना है कि पशुओं के मर्ज का पता सिर्फ मल-मूत्र और दूध की जांच से ही लगाया जा सकता है।
बुंदेलखंड में यह व्यवस्था अभी मात्र झांसी में है। बुंदेलखंड का अति पिछड़ा जनपद होने के कारण यहां पर ज्यादातर पशुपालक आर्थिक रूप से कमजोर हैं। झांसी जाकर जांच कराने की आर्थिक क्षमता नहीं रखते। मंडल में प्रत्येक जनपदीय प्रयोगशाला की लागत 35.73 लाख है।
प्रयोगशालाओं में स्टाफ और संसाधन की व्यवस्था न होने से बंद पड़ी हैं। इस बाबत कई बार शासन को पत्र लिखा गया है। स्टाफ और संसाधन उपलब्ध होते ही इन्हें चालू किया जाएगा। -डा. मनोज कुमार अवस्थी, उप निदेशक, पशु चिकित्सा, चित्रकूटधाम मंडल बांदा।