अतर्रा। पीजी कॉलेज में छात्रवृत्ति के आवेदन में जमा की गई फीस से कम राशि दर्ज किए जाने का विरोध हुआ।
इसके साथ ही महाविद्यालय में मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर मंगलवार को छात्र-छात्राओं का गुस्सा फूट पड़ा। प्राचार्य कक्ष के बाहर करीब दो घंटे तक प्रदर्शन कर विद्यार्थियों ने पांच सूत्री मांगों का ज्ञापन प्राचार्य डॉ. पीके विश्वकर्मा को सौंपा। कॉलेज प्रबंधन व छात्रों के बीच तीखी कहासुनी भी हुई।
छात्रों ने बताया कि महाविद्यालय के कृषि संकाय में प्रवेश के समय बीएससी कृषि के विद्यार्थियों से 25,036 रुपये और एमएससी कृषि के विद्यार्थियों से 30 हजार रुपये फीस जमा कराई गई थी।
इसके बावजूद छात्रवृत्ति फार्म में विश्वविद्यालय के निर्देश पर बीएससी के विद्यार्थियों की फीस पांच हजार और एमएससी के विद्यार्थियों की छह हजार रुपये दर्ज की जा रही है। इससे विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति का लाभ मिलने में नुकसान होने की आशंका है।
छात्रों ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर और अति पिछड़े क्षेत्र के कई विद्यार्थी छात्रवृत्ति के सहारे पढ़ाई करते हैं। ऐसे में जमा फीस के अनुरूप राशि दर्ज कराई जानी चाहिए। विद्यार्थियों ने मूलभूत सुविधाओं की कमी पर भी नाराजगी जताई। महिला शौचालय की व्यवस्था, परिसर और कक्षाओं की नियमित साफ-सफाई, पीने के पानी और विद्यार्थियों के बैठने के लिए उचित इंतजाम कराने की मांग की।
इसके साथ ही खेलकूद की सामग्री उपलब्ध कराने और कृषि संकाय में बीएससी व एमएससी के विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त पुस्तकें मुहैया कराने को कहा। छात्रों ने शिक्षा संकाय के विभागाध्यक्ष को बदलने की मांग भी उठाई। प्राचार्य डॉ. पीके विश्वकर्मा ने आश्वासन दिया कि महाविद्यालय स्तर की मांगों को जल्द पूरा कराया जाएगा।
उच्च स्तर से जुड़ी मांगों को संबंधित अधिकारियों के पास भेजा जाएगा। दो घंटे के बाद प्रदर्शन बंद हुआ। इस मौके पर छात्र नेता इंद्र प्रसाद त्रिपाठी, नीरज द्विवेदी, विकास दीक्षित, गोविंद उपाध्याय, उमंग सिंह आदि मौजूद रहे।
फोटो-19- अतर्रा पीजी काॅलेज में प्राचार्य से समस्याएं बताते छात्र व छात्राएं। संवाद