बात चौंकाने वाली है लेकिन है सौ फीसदी सच। डाक्टरों का कहना है कि भारत को अस्थमा का हब कहा जा सकता है, क्योंकि पूरे विश्व में लगभग तीन करोड़ अस्थमा के मरीज हैं। इसमें दस फीसदी मरीज भारत में हैं। हर 20 बच्चों में एक बच्चा अस्थमा का रोगी है।
ये बातें डॉ. अशोक गुप्ता एवं डॉ. नरेंद्र गुप्ता ने विश्व अस्थमा दिवस पर शुरू हुए ‘अस्थमा माह’ के मौके पर बृहस्पतिवार को प्रेस कांफ्रेंस में कहीं। बताया कि विश्व में लगभग एक अरब लोग सांस की बीमारी से पीड़ित हैं। इनमें लगभग 30 करोड़ अस्थमा के मरीज हैं।
भारत में अस्थमा के उतने ही मरीज हैं, जितने डायबिटीज और हृदय के। डाक्टरों ने कहा कि लगभग तीन करोड़ अस्थमा के मरीज भारत में हैं, जो पूरे विश्व का दस फीसदी है। बताया कि अस्थमा किसी भी उम्र में हो सकता है। बच्चों में भी यह रोग तेजी से बढ़ रहा है।
आज 20 में एक बच्चा अस्थमा से पीड़ित है। डाक्टरों ने कहा कि फेफड़े और अस्थमा के बारे में लोग बहुत कम जागरूक हैं। इसका इलाज समय से किया जाए तो कंट्रोल किया जा सकता है, वरना लाइलाज बन जाता है।
इनहेलर्स की वकालत करते हुए कहा कि यह अस्थमा को सफलतापूर्वक कंट्रोल कर लेता है। इससे कारगर और सुरक्षित दवा बाजार में नहीं है। बताया कि अस्थमा छुआछूत की बीमारी नहीं है।
इसके लक्षणों में सांस फूलना, खांसी, सीने से सीटी जैसी आवाजें आना, सीने में जकड़न शामिल हैं। अस्थमा के मरीजों को धूल, धुआं, मिट्टी आदि से बचना चाहिए। इस दौरान दवा कंपनी के नीरज कुमार द्विवेदी, अभिलेष सिंह भदौरिया और अनीशचंद्र भी मौजूद रहे।