नवाबी जामा मसजिद में अलविदा की नमाज का नजारा।
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बांदा। ‘अलविदा-अलविदा या शहरुल रमजान’। रमजान के आखिरी जुमे की नमाज में मसजिदों में पढ़े जाने वाले खुतबे की यह इबारत सुन कर रोजेदारों की आंखें छलक आईं। एक बेहद मुबारक महीने की विदाई की टीस चेहरों पर भी नजर आईं। इसी के साथ रमजान माह के आखिरी जुमा (जुमातुल विदा) की नमाज अदा की गई। मसजिदों में तिल रखने की जगह नहीं बची। सड़कों तक सफें (कतारें) लगीं।
शुक्रवार को 25वीं रमजान को आखिरी जुमा था। इसे लेकर रोजेदारों और नमाजियों में खास उत्साह था। सुबह से ही लोग नहा-धोकर साफ-सुथरे कपड़ों में उन मसजिदों की ओर चल पड़े जहां अलविदा की नमाज अदा होती है। मुख्य नमाज शहर की नवाबी जामा मसजिद में हुई। इस विशाल मसजिद में अंदर से बाहर तक नमाजी खचाखच भरे रहे। मसजिद प्रबंधन ने सामने सड़क पर बेरीकेडिंग कराकर शामियाने लगवाए थे जिन्हें मसजिद में जगह नहीं मिली उन्होंने सड़क पर लगे टेंट तले नमाज अदा की। मुतवल्ली डा. शेख सादी जमां व्यवस्थाओं में लगे रहे। मौलवी समीउल्ला ने इमामत करते हुए नमाज अदा कराई। नमाज के बाद देर तक दुआओं में मुल्क की अमन और सलामती भी मांगी गई।
शहर की कई अन्य मसजिदों में भी अलविदा की नमाज में भारी भीड़ उमड़ी।
कालवन गंज स्थित शेख सरवर साहब की मसजिद भी खचाखच भर गई। सड़क पर दूर तक लगाए गए शामियाने तले लोगों ने नमाज अदा की। मौलाना मेराज मसूदी (अकील मियां) ने नमाज अदा कराई। सलामती और तरक्की की दुआ मांगी। मरकज मसजिद कोतवाली रोड, हाथी खाना रब्बानिया वाली मसजिद, पीरा मसजिद अलीगंज, नवाब टैंक मसजिद, ऊंट मोहाल मसजिद, खुटला मसजिद, कचहरी मसजिद, क्योटरा मसजिद, नूरानी मसजिद, बोड़े मसजिद, सुतली वाली गली मसजिद, लाठी मोहाल मसजिद आदि में भी नमाज हुई। उधर, जीजीआईसी के सामने स्थित शिया मसजिद में भी अलविदा की नमाज अदा की गई। यहां मौलाना इरशाद अब्बास ने नमाज अदा कराई। प्रशासन ने जामा मसजिद में ट्रैफिक व्यवस्था सहित सफाई और पानी के टैंकर के इंतजाम कराए थे। अन्य मसजिदों में भी नगर पालिका ने सफाई और चूना-कलई कराई। जल संस्थान ने टैंकरों की व्यवस्था की। कोर्रही। मुस्लिम बाहुल्य इस गांव में भी पांच मस्जिदों में अलविदा की नमाज अदा की गई। सभी मस्जिदें नमाजियों से भरी रहीं। मस्जिदों में हाफिज अब्दुल रशीद, हाफिज शमीम खां, हाफिज शकील खां, हाफिज रजा हुसैन और हाफिज सोनू ने नमाज अदा कराई।