बांदा में पोकलैंड से नदी से निकाली जा रही बालू।
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बांदा। आवासीय परिसर के बेसमेंट में जेसीबी से खुदाई करा रहे वरिष्ठ चिकित्सक पर जितनी त्वरित और तल्ख कार्रवाई प्रशासन ने अमल में लाई, काश उसी तर्ज पर राष्ट्रीय नदियों की जलधाराओं, पहाड़ और खदानों में रात-दिन चल रही पोकलैंड मशीनों पर कार्रवाई होती।
शहर के सिविल लाइन में वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डा. नरेंद्र गुप्ता अपने आवासीय परिसर में जेसीबी से बेसमेंट की खुदाई करा रहे थे। डीएम और सिटी मजिस्ट्रेट मौके पर पहुंचे। पता चला कि बिना नक्शा पास कराए और लॉकडाउन नियमों का उल्लंघन करके खुदाई कराई जा रही है।
आनन-फानन में प्राधिकरण ने एफआईआर दर्ज कराई। पुलिस ने डॉ. को गिरफ्तार कर लिया। देर रात उन्हें मुचलके पर कोतवाली से रिहा किया गया। उधर, प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद यह चर्चा भी चल पड़ी कि काश यही तेवर और तल्ख मिजाजी प्रशासन नदियों की जल धाराओं और खदानों व पहाड़ों आदि में पोकलैंड मशीनों से रात दिन हो रहे अवैध खनन पर अपनाता तो लाखों रुपये रोजाना राजस्व/रायल्टी की चोरी बच जाती।
पर्यावरण के प्रति लगातार सरकार का ध्यान आकृष्ट करा रहे प्रवास सोसाइटी के आशीष सागर दीक्षित का कहना है कि बालू माफियाओं, सत्ता नशीनों और अफसरशाहों की तिकड़ी एनजीटी और हाईकोर्ट के आदेशों को भी नजरअंदाज कर खदानों के प्रति चुप्पी साधे है। नदियों की जल धाराएं रोककर बेधड़क अवैध खनन हो रहा है। केन, बागै, यमुना आदि नदियों का अस्तित्व मिटने की कगार पर है।