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लाखों खर्च के बाद भी 27 हजार बच्चे कुपोषित

Wed, 13 Apr 2016 12:14 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
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केंद्र पर कुपोषित बच्चे भर्ती न मिलने से डीएम नाराज - फोटो : अमर उजाला
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बांदा। हॉटकुक्ड के नाम पर हर महीने 27 लाख रुपये खर्च होने के बाद भी जिले में 27 हजार से ज्यादा बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों पर न गैस सिलेंडर है और न ही चूल्हे। इसके बावजूद बच्चों को रोजाना गर्म भोजन परोसने जैसी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जा रही है। हाटकुक्ड के नाम पर सिर्फ पंजीरी के पैकेट दिए जा रहे हैं। पंजीरी इतनी घटिया है कि न महिलाएं खाती हैं न बच्चे। बच्चे इन्हें पशुपालकों बेंचकर टाफी खरीद लेते हैं।
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जिले में 1722 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। तीन से छह साल तक के बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए रोजाना पौष्टिक और गर्म भोजन देने का प्रावधान है। शासन ने दो-दो दिन कठिया गेहूं हलुवा व दलिया, एक-एक दिन तहरी और खिचड़ी का मेन्यू निर्धारित किया है। प्रति बच्चा 3.50 रुपये की दर से सरकार बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग को भारी-भरकम बजट दे रही है। पिछले महीने मार्च में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के खाते में हॉटकुक्ड के लिए 26,69,845 रुपये भेजे थे। इसमें शहर की स्लिम आबादी (दलित बस्ती) में 2,88,969 रुपये, नरैनी ब्लाक में 3,78,700, बड़ोखर खुर्द के लिए 2,88,400, बिसंडा ब्लाक में 6,04,069, कमासिन में 3,04,980, बबेरू में 4,18,250, महुआ में 2,96,100, तिंदवारी में 2,57,033 और जसपुरा में 1,53,344 रुपये का हाटकुक्ड बच्चों को खिलाया जाना बताया गया है।

आंगनबाड़ी केंद्रों पर इतना पौष्टिक भोजन खाने के बावजूद कुपोषित बच्चों की तादाद बढ़ती जा रही है। हाल ही में पोषण मिशन के तहत 27 हजार से ज्यादा बच्चों को कुपोषित पाया गया है। असलियत यह है कि पुष्टाहार की घटिया पंजीरी न तो महिलाएं खाती हैं और न ही बच्चे। कार्यकत्रियां कुछ बच्चों को बुलाकर यही पंजीरी के पैकेट बांट देती हैं। बच्चे यह पैकेट पशुपालकों को बेंचकर बिस्कुट या टाफी खा लेते हैं। उधर, आंगनबाड़ी केंद्रों पर गर्म भोजन बनाने का निर्देश है, पर कहीं सिलेंडर व चूल्हे का इंतजाम नहीं है। शहर के कुछ केंद्रों पर तो कार्यकत्रियां घरों से खिचड़ी या दलिया पकाकर बच्चों को खिलाती हैं। ग्रामीण इलाकों के केंद्रों पर सिर्फ पंजीरी ही हाथ लगती है।
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‘आंगनबाड़ी केंद्रों में नियमित व रोज हाटकुक्ड बनाने के निर्देश हैं। समय-समय पर केंद्रों का निरीक्षण भी किया जाता है। लापरवाही मिलने पर कार्रवाई भी होती है। पिछले साल सैकड़ा भर से ज्यादा कार्यकत्रियों का वेतन रोका गया था। फिलहाल गड़बड़ी जैसी कोई शिकायतें नहीं मिली।’
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अर्जुन सिंह, प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी, बांदा
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