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Banda News: डीएपी के बाद अब यूरिया का संकट, केंद्रों में मारामारी

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बांदा। फसलों की बोआई के समय डीएपी का संकट झेल चुके किसान अब गेहूं में टॉप ड्रेसिंग के लिए यूरिया खाद की तलाश में भटक रहे हैं। उन्हें इस तरह की सर्दी में लंबी लाइन में लगना पड़ रहा है और मायूस होकर लौटना पड़ता है। बुधवार को जसपुरा समिति में किसानों की लंबी कतारें रहीं। खाद न मिलने पर किसानों ने हंगामा किया। पुलिस ने उन्हें शांत कराया।
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गेहूं, सरसों, मटर आदि फसल बचाने के लिए किसानों को यूरिया की जरूरत है, लेकिन पीसीएफ के पास खाद का स्टॉक सीमित है। किसानों का कहना है कि जो गेहूं की फसल 20 से 25 दिन की हो चुकी है, उनमें पानी लगाया गया है। अब यदि यूरिया खाद का छिड़काव नहीं किया गया तो फसल बर्बाद हो जाएगी। केंद्रों में एक-एक बोरी खाद तीन-तीन दिन लाइन लगाने पर ही मिल पा रही है। इस तरह की कड़ाके की सर्दी में किसान सुबह चार बजे से टोकन के लिए लाइन में लग रहे हैं। एक केंद्र में करीब 100 किसानों को ही टोकेन दिए जा रहे हैं। बाकी के किसान लाइन में लगने के बाद भी मायूस हो रहे हैं। खाद न मिलने पर किसान हंगामा कर रहे हैं। बुधवार को जसपुरा कस्बा स्थित सहकारी समिति में यूरिया खाद पहुंची तो सुबह से ही किसानों की भीड़ जुट गई। करीब पांच सौ किसान लाइन में लग गए। टोकेन सिर्फ 70 किसानों को दिया गया। खाद न मिलने पर किसानों ने हंगामा शुरू कर दिया।
किसान नेता पुष्पेंद्र सिंह चुनाले का कहना का कहना था कि सोसायटी के अध्यक्ष व सचिव भगवा धारियों को बिना कोई टोकेन व लाइन के खाद दे रहे हैं। आम किसान लाचार होकर सब देखते रहते हैं। एक-एक बोरी के खाद के लिए सुबह भोर में आकर बैठ जाता है,जब समिति खुलती है तो आशा भरी निगाह से देखते रहते हैं। हंगामा कर रहे किसानों को पुलिस ने शांत किया। समिति के सचिव अजय शुक्ला ने बताया कि किसानों की संख्या ज्यादा है और खाद कम आ रही है। इससे दिक्कतें हो रही हैं।अध्यक्ष राकेश सिंह चौहान का कहना कि जो सोसाइटी के सदस्य हैं, उनको ही खाद दी जाएगी।
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