बांदा। प्रांतीय खंड पीडब्ल्यूडी में तैनात सहायक अभियंता का रसूख आखिर शासनादेश पर भारी पड़ा। दो-दो मामलों में लाखों रुपये का घोटाला करने के दोषी एई का तबादला पिछले वर्ष झांसी किया गया था। विधायक व डीएम की सिफारिश पर एई को एक साल के अंदर ही उसी खंड में तैनाती मिल गई, जबकि, शासनादेश में स्पष्ट उल्लेख है कि बिना कोई विशेष परिस्थिति के किसी भी अधिकारी व कर्मचारी का तबादला नहीं किया जा सकता।
प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग में तैनात रहे तत्कालीन अधिशासी अभियंता सुमंत कुमार और मौजूदा समय में यहां तैनात सहायक अभियंता अजय कुमार, सुधीर कुमार व आरके तिवारी ने वर्ष 2022 में एक लाख के अनुबंध में 39 लाख का भुगतान कर दिया था। इस मामले में मुख्य अभियंता ने जांच कराई। दोषी पाए जाने पर अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके अलावा पिछले वर्ष मरौली संपर्क मार्ग के विशेष मरम्मत कार्य में 12 लाख रुपये का घपला किया गया। तत्कालीन मंडलायुक्त आरपी सिंह ने मामले की टीएसी जांच कराई तो बिना कार्य कराए 12 लाख का भुगतान कराने का मामला सामने आया।
उन्होंने मुख्य अभियंता को दोषियों पर कार्रवाई करने और रिकवरी कराने के आदेश दिए थे। इसमें अधिकारियों ने दोषियों पर 12 लाख की रिकवरी के बजाय 22 लाख की रिकवरी का नोटिस जारी किया। मामले में लीपापोती के लिए ये कृत्य किया गया। इसके बाद दोषी अधिकारियों ने न्यायालय में याचिका दायर की। इस वजह से यह रिकवरी नहीं हो सकी। पांच वर्ष से अधिक यहां तैनाती होने व इन मामलों में दोषी एई अजय कुमार का तबादला 26 जून 2023 को लोक निर्माण विभाग झांसी कर दिया गया था।
भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने के उद्देश्य से तत्कालीन एक्सईएन राजाराम मथुरिया ने शासनादेश को दर किनार कर उन्हें तीन माह तक कार्यमुक्त नहीं किया। इसके बाद 30 सितंबर को उन्हें यहां से रिलीव किया गया। करीब एक वर्ष झांसी में कार्य करने के बाद फिर से एई अजय कुमार को प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग बांदा में स्थानांतरित कर दिया गया।
माननीय व तत्कालीन डीएम के अनुरोध पर तबादला
शहर के जेल रोड निवासी पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष सुशील त्रिवेदी ने जनसूचना में लोक निर्माण विभाग के उच्चाधिकारियों से इस बाबत जानकारी मांगी। कहा कि आखिर किस वजह से एई अजय कुमार का तबादला नियम विरुद्ध फिर उसी खंड में किया गया। इस पर 29 नवंबर को लोक निर्माण विभाग अनुभाग-4 के अनुभाग अधिकारी सतीश कुमार ने आरटीआई में जानकारी दी। कहा कि विधायक व जिलाधिकारी के अनुरोध किए जाने के बाद उनका तबादला स्थानांतरण नीति के तहत किया गया है। वहीं छात्र नेता का कहना है कि उनके यहां रहते घोटालों के मामले में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हो सकती।
इन स्थितियों में हो सकती है दोबारा वापसी
लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता ने 15 जून के पत्र में स्पष्ट किया है कि अधिकारी व कर्मचारी के व्यक्तिगत कारणों जैसे चिकित्सा, बच्चों की शिक्षा, शासकीय सेवा के दौरान मृत माता-पिताके अव्यस्क बच्चों के पालन पोषण इत्यादि आधार पर ही दोबारा उसी जिले में तैनाती दी जा सकती है। छात्र नेता ने कहा कि सहायक अभियंता अजय कुमार ने ऐसे कोई व्यक्तिगत कारण भी नहीं बताए हैं।
नोट: सर, डीएम अभी कांफ्रेंस मीटिंग में हैं। थोड़ी देर में वर्जन देंगे।
20जेएनडी10 : सुधीर। संवाद
20जेएनडी10 : सुधीर। संवाद
20जेएनडी10 : सुधीर। संवाद
20जेएनडी10 : सुधीर। संवाद