बांदा। पहले चरण के ‘मंगल टीका’ के बाद अब प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग 22 जनवरी को दूसरे चरण के टीकाकरण की तैयारियों में जुट गया है। अबकी जिले के सभी 11 केंद्रों में टीकाकरण की संभावना है।
पहले की तरह दूसरे चरण में भी प्रत्येक बूथ में 100 कोरोना योद्धाओं को कोविशील्ड वैक्सीन लगाई जाएगी। पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट में तैयार कोविशील्ड वैक्सीन की खेप आने के बाद 16 जनवरी को जबरदस्त प्रशासनिक तैयारियों और पुलिस पहरे के बीच टीकाकरण हुआ था।
पूर्व में चिह्नित 11 बूथों में वैक्सीन लगाई जानी थी, लेकिन ऐन वक्त पर शासन के बदलाव से मात्र चार केंद्रों पर ही टीकाकरण हुआ। 400 कोरोना योद्धा स्वास्थ्य कर्मियों का लक्ष्य निर्धारित था, लेकिन सिर्फ 263 ने ही वैक्सीन लगवाई।
शासन द्वारा दूसरे चरण के टीकाकरण की तिथि 22 जनवरी तय करते ही प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने तैयारियां शुरू कर दीं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. एनडी शर्मा ने बताया कि टीकाकरण के लिए जिले में 11 बूथ चिह्नित हैं, सभी तैयारियां पूरी कर ली गईं हैं।
दूसरे चरण में कितने बूथों पर वैक्सीन लगाई जानी है, फिलहाल इसके निर्देश शासन से नहीं मिले हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पहले चरण में छूटे स्वास्थ्य कर्मियों को सारे राउंड पूरे होने के बाद टीका लगाया जाएगा।
मानक पूरे नहीं तो पंजीकरण होगा निरस्त
बांदा। मानक के मुताबिक अग्निकांड से निपटने के पर्याप्त इंतजाम न होने पर निजी अस्पतालों का पंजीकरण निरस्त हो सकता है। महाराष्ट्र के भंडारा स्थित अस्पताल में हुए अग्निकांड की घटना से सबक लेते हुए सीएमओ ने अभियान चलाकर अस्पतालों की जांच के निर्देश दिए हैं।
इसके अलावा सभी सरकारी अस्पतालों के चिकित्साधीक्षकों को फायर ब्रिगेड विभाग से एनओसी (अनापत्ति प्रमाणपत्र) लेने के भी निर्देश दिए हैं। एनओसी न होने की खबर अमर उजाला ने प्रकाशित की थी।
सीएमओ डा. एनडी शर्मा ने बताया कि निजी अस्पतालों द्वारा एनओसी दिए जाने के बाद ही पंजीकरण होता है, फिर भी संसाधनों और सुरक्षा इंतजामों की जांच के लिए टीम गठित की गई है। नोडल अधिकारी एसीएमओ डा. आरएन प्रसाद को नियुक्त किया गया है। शीघ्र अभियान चलाया जाएगा।
मानक पूरे न होने पर पंजीकरण निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी। सीएमओ ने बताया कि जिला पुरुष व महिला अस्पतालों सहित सभी सरकारी अस्पतालों के चिकित्साधीक्षकों को पत्र जारी कर अग्निशमन विभाग से एनओसी लेने को कहा गया है। साथ ही अस्पतालों में आग से बचाव के पर्याप्त संसाधन रखने के भी निर्देश दिए गए हैं।