बांदा। सूखे से कराह रहे किसान सरकारी मदद के लिए भटक रहे हैं तो दूसरी ओर किसानों की मदद के लिए शासन से आए सवा तीन करोड़ से अधिक रुपये सरकारी खजाने में डंप हैं। इस साल ओलावृष्टि से चौपट हुई रबी की फसल में किसानों को अनुदान के लिए सरकार ने तीन करोड़ 63 लाख 91 हजार रुपये दिए हैं। फरवरी से मार्च के बीच तीन किस्तों में ये रुपये मिले लेकिन अभी तक प्रशासन सिर्फ 35 लाख रुपये ही बांट पाया है। तीन करोड़ 28 लाख 91 हजार रुपये प्रशासन दाबे बैठा है।
प्रशासन के दैवी आपदा विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक इस साल प्रदेश सरकार 63 करोड़ 16 लाख 97 हजार रुपये दे चुकी है। इसमें से 57 करोड़ 65 लाख 21 हजार रुपये खर्च होना दिखाया है। सरकारी राहत बांटने में प्रशासन सबसे ज्यादा कंजूसी कृषि निवेश अनुदान में कर रहा है। सरकार ने ओलावृष्टि से रबी 2015-16 की बर्बाद फसल के नुकसान पर पीड़ित किसानों को कृषि निवेश अनुदान के रूप में देने के लिए तीन करोड़ 63 लाख 91 हजार रुपये दिए हैं लेकिन बांदा का राजस्व और दैवी आपदा विभाग अब तक पूरी रकम नहीं बांट पाया है।
दैवी आपदा अंश से संबंधित अन्य राहत बांटने में भी प्रशासन कंजूसी कर रहा है। सूखा पड़ने से सब्जी की खेती भी नहीं हुई। सब्जी उगाने वाले किसान बेहाल हैं। प्रदेश सरकार ने उनके लिए 16 लाख 80 हजार रुपये दिए थे। इसमें भी एक रुपया तक नहीं बांटा गया। नहरों की कटान रोकने और सिल्ट आदि की सफाई के लिए इस वित्तीय वर्ष में एक करोड़ 20 लाख रुपये दिए गए। इसमेें भी अब तक धेला नहीं खर्च हुआ। नलकूपों और लिफ्ट कैनाल के लिए 76.05 लाख दिए गए हैं। यह पैसा भी डंप है। प्रशासन ने कुछ नहीं बांटा।
इस बाबत अपर जिलाधिकारी/प्रभारी अधिकारी दैवी आपदा गंगाराम गुप्ता का कहना है कि राहत वितरण का काम लगातार चल रहा है। जो पैसा शेष है, वह भी जल्द बांट दिया जाएगा।