बांदा। आदाबे मोहब्बत की जबां है उर्दू, कतरे में
समंदर का निशां है उर्दू, तहजीब ही कुछ और नजर आती है, दुनियां में जिधर भी
या जहां है उर्दू।
इसी शेर के साथ राजकीय महिला डिग्री कालेज में
उर्दू विभाग अध्यक्ष डॉ. दाऊद अहमद ने उर्दू गोष्ठी की शुरूआत की। छात्राओं
ने भी शेरों और दलीलों से उर्दू को देश में प्यार-मोहब्बत फैलाने और
बढ़ाने वाली भाषा बताया।
शनिवार को महाविद्यालय मेें हुई गोष्ठी के
लिए ‘वर्तमान समय में उर्दू का महत्व’ विषय निर्धारित था। डा. दाऊद ने
उर्दू को अदबी महफिलों और शिक्षण संस्थाओं तक सीमित न रखने पर जोर दिया।
एमए
(उर्दू) द्वितीय वर्ष की छात्रा महजबी खान ने उर्दू जबां को बेहद शीरीनी
(मीठी) और सादगी से भरपूर बताते हुए कहा कि मौजूदा वक्त में मुल्क की एकता
और तरक्की के लिए इस जबां को बढ़ावा देना जरूरी है। बीए प्रथम वर्ष की
सैय्यदा जैदी ने उर्दू की नज्म सुनाई।
महाविद्यालय प्रवक्ता डा. सबीहा रहमानी ने उर्दू को तहजीब से जुड़ा बताकर इसकी तरक्की के लिए कोशिश करना फर्ज बताया।
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प्रथम वर्ष की छात्रा सकीना जाफर ने कहा कि उर्दू हिंदुस्तान की जबान है।
किसी खास फिरके या मजहब की नहीं। बीए द्वितीय वर्ष की सबीहा अख्तर ने उर्दू
को गंगा-जमुनी संस्कृति का नमूना बताया।
गोष्ठी की अध्यक्षता कर
रहीं प्राचार्य प्रभा श्रीवास्तव ने उर्दू का इतिहास और महत्व की जानकारी
दी। महाविद्यालय की प्रवक्ता सुमन निगम, डा. दीपाली गुप्ता, डा. राकेश
शर्मा, डा. मीना कुमारी, डा. माया वर्मा और रजनी भार्गव सहित बड़ी संख्या
में छात्राएं उपस्थित रहीं।