विशेष न्यायाधीश ने अवैध राइफल की नोक पर 50 हजार रुपये रंगदारी मांगने के आरोपी को दोष मुक्त कर दिया। नाजायज असलहा व कारतूस रखने के आरोप में उसे दो वर्ष की सश्रम कैद और अर्थदंड की सजा सुनाई है।
कालिंजर थाने के सिघौटी ग्राम प्रधान देवसरन पटेल पुत्र गया प्रसाद ने 30 जुलाई 2014 में तहरीर देकर रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 29 जुलाई 2014 को वह अपनी बोलेरो से ड्राइवर बाबू (रानीपुर) के साथ भउवा पुरवा अंश सिंघौटी में खुली बैठक करने जा रहा था। दोपहर करीब 12 बजे परसहर गांव निवासी साहबदीन उर्फ रामनरेश त्रिपाठी पुत्र गिरिजा शरण त्रिपाठी ने मोड़ के पास उसे रोककर सीने में राइफल तान दी। 50 हजार रुपये रंगदारी देने को कहा।
रुपये न देने पर जान से मारने और परिवार को बर्बाद करने की धमकी दी। पुलिस ने धारा 387, 506 आईपीसी के तहत रिपोर्ट दर्ज की। विवेचना एसआई ओमप्रकाश वर्मा को दी गई। विवेचक ने पहली अगस्त 2014 को अभियुक्त साहबादीन को एक अद्द 315 बोर देशी राइफल व 7 जीवित कारतूस की बरामदगी कर 3/25 आर्म्स एक्ट की बढ़ोत्तरी कर दी। दोनों मामलों में चालान कर दिया। विवेचक ने आरोपपत्र लगाकर अदालत में विचारण के लिए पेश किया।
विशेष न्यायाधीश (डकैती प्रभावित क्षेत्र) हरिनाथ पांडेय की अदालत में सहायक शासकीय अधिवक्ता आशुतोष मिश्रा व प्रमोद कुमार द्विवेदी ने मामलों में पांच गवाह पेश किए। कोर्ट ने अधिवक्ताओं के तर्क सुनने के बाद व पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों के अवलोकन के बाद शनिवार को अभियुक्त साहबदीन को 387/506 में दोष मुक्त कर दिया।
जबकि 3/25 आर्म्स एक्ट में दोषी पाते हुए उसे दो वर्ष सश्रम कारावास और 500 रुपये का अर्थदंड सुनाया। अदा न करने पर 15 दिन की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। अभियुक्त द्वारा जेल में बिताई गई अवधि सजा में समायोजित की जाएगी। फिलहाल अभियुक्त 29 माह से मंडल कारागार में निरुद्ध है।