सेमिनार संबोधित करतीं आईवीएफ स्पेशलिस्ट डा.हिना अली।
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बांदा। दुर्घटना में शरीर का कोई भी अंग कट जाने पर उसे तत्काल सेलाइन और साफ पानी से धोकर प्लास्टिक की थैली में बर्फ के साथ रखकर इसे एक और थैली में डालते हुए शीघ्र सर्जरी हॉस्पिटल पहुंचने पर कटे अंग का प्रत्यारोपण संभव है। यह जानकारी कंसलटेंट नोवा हॉस्पिटल, लखनऊ के डा. सुहेब रफीक ने दी। वह यहां लखनऊ मेडिकल सेंटर प्राइवेट लिमिटेड/रफीक नर्सिंग होम और सिंबायोटिक फार्मा के राजकीय मेडिकल कालेज सभागार में बहु विषयक सेमिनार को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने लिंब सालवेज इन ट्रामा अर्थात शरीर का कोई अंग कटने पर उसे पुन: प्रत्यारोपित करने की जानकारियां दीं। वरिष्ठ आईवीएफ स्पेशलिस्ट (नि:संतानता रोग विशेषज्ञ) डा. हिना अली (लखनऊ) ने कहा कि नि:संतानता से पीड़ित लोग 35 वर्ष की उम्र से पहले विशेषज्ञ से संपर्क करें तो रिजल्ट अच्छे होते हैं। इसका कारण भी जानना होता है। बिना आईवीएफ के भी सफलता मिल सकती है। आईएमए की उपाध्यक्ष डा. शबाना रफीक ने कहा कि प्राइवेट और सरकारी डाक्टरों को संयुक्त रूप से समय-समय पर ऐसे सेमिनार करवाकर नई चिकित्सा पद्धति पर चर्चा करनी चाहिए।
मेडिकल कालेज प्रधानाचार्य डा. मुकेश यादव ने कहा कि चिकित्सा जगत में हर पल रिसर्च से नए इलाज की खोज होती है। वाइस प्रिंसिपल डा. सुनील कौशल और प्रोफेसर डा. सुनील आर्य ने आयोजन की सराहना की। चेयरपर्सन डा. अनुपमा उपाध्याय सहित डा. प्रेमशंकर, डा. सुशील गौतम के अलावा आईएमए सचिव डा. नरेंद्र गुप्ता, डा. टीआर सरसैय्या, डा. एसआर वर्मा, डा. राहुल, डा. प्रज्ञा प्रकाश, डा. सुशील, डा. विनीत सचान, डा. अनूप सिंह, डा. विक्रम सिंह, डा. कंचन, डा. एचएन सिंह, डा. राजेश एवं मृदुला, डा. सत्यनारायण, डा. अकील, डा. रामऔतार, डा. रामजी आदि शामिल रहे। आईएमए अध्यक्ष फिजीशियन डा.मोहम्मद रफीक ने सभी का आभार जताया। संचालन एमबीबीएस के छात्र बृजेश सिंह ने किया।