अफसरों की उदासीनता से एक साल पहले बनकर तैयार हुआ मत्स्य हाट वीरान पड़ा है। बिजली, पानी और जल निकास की सुविधा न होने से दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है।
वर्ष 2013-14 में पुराने विकलांग विद्यालय के पास 17 लाख रुपये की लागत से मत्स्य हाट का निर्माण कराया गया था। 10 दुकानें बनाने के बाद मत्स्य विभाग ने इसकी सुध नहीं ली। अब कुछ दुकानों के शटर खराब होने लगे हैं। हैंडपंप बोर और बिजली कनेक्शन न होने के साथ जल निकासी की व्यवस्था नहीं की गई।
नतीजा यह हुआ कि यहां मत्स्य व्यापार शुरू ही नहीं हो पाया और पड़ोसी यहां मवेशी बांधने लगे। उधर, सहायक निदेशक मत्स्य डॉ. डीएन पांडेय के मुताबिक कार्यदायी संस्था को अभी 1.70 लाख और आवंटित किया जाना है। हस्तांतरण के बाद वह यह दुकानें नगर पालिका को सौंप देंगे। इसका किराया भी नगर पालिका वसूल करेगी।