बांदा। प्राणी तो मात्र मदारी का बंदर है। ईश्वर उसे जैसे नचाते हैं, वह उसी तरह नाचता है। प्रभु की मर्जी के बिना पत्ता भी नहीं हिलता। ये बातें कथावाचक जगदीश मिश्र ने हार्पर क्लब में श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कहीं।
संकट मोचन मंदिर में अखंड श्रीराम नाम संकीर्तन के छह साल पूरे होने पर हार्पर क्लब में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन चल रहा है। कथा वाचक ने ध्रुव की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि राम कीन्ह चाहै सोई होई, करै अन्यथा अस नहि कोई। परमात्मा की इच्छा से ही हर कार्य होते हैं।
वह जैसा चाहते हैं वैसा करवाते हैं। एक बार एक संत नौका से यात्रा कर रहे थे। नौका में छेद से जल भर गया। नाव डूबने लगी तो संत ने सोचा कि परमात्मा की इच्छा से नौका डूब रही है। संत ने अपने कमंडल से दो कमंडल और पानी नाव में डाल दिया लेकिन प्रभु कृपा से नौका डूबने से बच गई।
संत फिर नौका से जल निकालकर फेंकने लगे। अर्थात संत ने ईश्वर की इच्छा में अपनी इच्छा भी सम्मलित कर दी। भागवत कथा में वृंदावन से आए महेंद्र शुक्ल व प्रधान पाठक ने 108 विद्वान ब्राह्मणों के माध्यम से भागवत का मूल परायण करवाया। मुख्य आयोजक भोले महाराज व मुख्य यजमान समीर सिंह, अमिता वाजपेयी, किशन सिंह कछवाह इत्यादि मौजूद रहे। उधर, कथा स्थल पर गीता का सामूहिक पाठ भी हुआ।