जसपुरा थाना क्षेत्र के सिकहुला गांव में 70 वर्षीय किसान गोरेलाल की कर्ज के बोझ तले दबकर हुई मौत ने पूरे क्षेत्र को झंकझोर दिया है। चार बीघे के सीमांत किसान गोरेलाल ने चार साल पहले आर्यवर्त बैंक से खेती के लिए 70 हजार रुपये का केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) ऋण लिया था। यह ऋण, जो कभी जीवनयापन का सहारा बनने वाला था, आखिरकार उसकी जान का दुश्मन बन गया। गोरेलाल की मेहनत को लगातार प्रकृति की मार झेलनी पड़ी। सूखे, ओलावृष्टि और छुट्टा पशुओं के कारण उसकी फसलें बार-बार बर्बाद हुईं। इन प्राकृतिक आपदाओं के चलते उसकी आमदनी शून्य हो गई, जबकि बैंक का कर्ज ब्याज सहित बढ़ता गया। नवंबर तक 70 हजार रुपये का यह कर्ज बढ़कर एक लाख 30 हजार रुपये हो गया था। परिवार के सदस्यों के अनुसार बैंक की ओर से गोरेलाल को चार-चार नोटिस भेजे गए और लगातार भुगतान के लिए दबाव बनाया जा रहा था। यह दबाव एक वृद्ध किसान के लिए असहनीय साबित हुआ। पहले से ही खेत की मेड़ों पर झुकी कमर, कर्ज के नोटिसों के बोझ तले पूरी तरह टूट गई। जिससे किसान ने आत्महत्या कर ली।