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ऐश-ओ-आराम का जीवन गुजार रहे धनबली कैदी

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बांदा। मंडल कारागार में सारे नियम-निर्देश ताक पर हैं। जेल में बंद कैदियों को ऐश-ओ-आराम की सभी सुविधाएं व नशीली चीजें उपलब्ध कराई जा रही हैं। एक हाथ पैसा तो दूसरे हाथ खाने के लजीज व्यंजन से लेकर गुटखा, पान मसाला, बीड़ी, शराब व गांजा तक हाजिर है। जेल के एक जिम्मेदार अधिकारी ने खुद यह खुलासा कर हैरत में डाल दिया। बताया नियम-निर्देशों का अनुपालन कराने पर उनका मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा है।
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मंडल कारागार में बंद आम कैदियों को भले ही दाल के साथ कंकड़ और धूल भरी कच्ची रोटी परोसी जा रही हैं लेकिन धनबली कैदी ऐशो आराम से हैं। जेल के अंदर चल रही कैंटीन से पैसे के बल पर उन्हें जायकेदार व्यंजन सादे व आलू के पराठे, किस्म-किस्म की चटपटी सब्जियां व मिष्ठान आसानी से मुहैया हो जा रही हैं। इतना ही नहीं कैंटीन से ही कैदियों को बीड़ी, पान मसाला, गांजा से लेकर शराब तक परोसी जा रही है। गोदामों से कैदियों के हक का मिलने वाला पूरा गल्ला भी उन तक नहीं पहुंच रहा है। उसमें कटौती कर जेब गरम की जा रही है। कारागार की प्रत्येक बैरक में प्रधान की नियुक्ति अवैध तरीके से की गई है। ये प्रधान कारागार में बंद कैदियों से सुविधाओं के एवज में हर माह तकरीबन 60-70 हजार रुपए वसूल कर अधिकारियों तक पहुंचाते हैं। इसकी पुष्टि खुद जेल के एक जिम्मेदार अधिकारी ने की। उन्होंने बताया कि यदि वे इस पर प्रतिबंध लगाते हैं या कड़ाई करते हैं तो उनका मानसिक रूप से उत्पीड़न किया जा रहा है। इसकी शिकायत भी उक्त अधिकारी ने महानिरीक्षक कारागार प्रशासन व शासन तक भेजी हैं।
बदनाम करने की साजिश : अधीक्षक
बांदा। मंडल कारागार के वरिष्ठ जेल अधीक्षक एसके श्रीवास्तव ने इन बातों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि द्वेषवश उन्हें बदनाम करने की यह साजिश है। यदि जेल के अंदर इतना सब कुछ हो रहा है तो उच्चाधिकारी जांच कर कार्रवाई कर सकते हैं। कैदियों के हक के राशन में कटौती पर उन्होंने चुप्पी साध ली।
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