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दवाओं के 46 नमूनों की जांच सात हुए फेल

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बांदा। मेडिकल स्टोरों से दवाएं खरीदते समय कहीं आप धोखा तो नहीं खा रहे हैं? जानिए कि इन दिनोें नकली दवाओं का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। मेडिकल स्टोरों से लिए 46 सैंपल की जांच में सात फेल हो गए हैं। इनमें आयुर्वेदिक औषधि समेत सीरप व लोशन शामिल हैं। अब ड्रग एवं केमिस्ट एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करने की तैयारी है।
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औषधि विभाग से जांच के लिए विधिशाला को भेजे गए नमूनों में 10 की रिपोर्ट चौकाने वाली है। इसमें सात दवाएं मिथ्या छाप (रैपर कुछ और दवा कुछ) पाई गईं। तीन नामी कंपनियों के नाम पर नकली दवाएं मिली हैं। इनमें एरिस्टो फार्मास्टिकल का लोशन, वापी केयर प्राइवेट लिमिटेड का सीरप शामिल है। इन कंपनियों की दवाओं के तीन सैंपल की जांच कराई और कंपनियों को भी सफाई देने का मौका दिया गया। पुष्टि होने पर तीनों पर मुकदमा दर्ज करने की तैयारी की जा रही है।
उधर, ड्रग इंसपेक्टर आशुतोष मिश्रा ने बताया कि नकली दवा बेचने वाली कंपनियों के खिलाफ ड्रग असॉल्टी से कार्रवाई की परमीशन मिल गई है। ड्रग एवं कास्मेटिक एक्ट 1940 के तहत मुकदमा दर्ज करने के बाद मामले की स्पेशल कोर्ट में सुनवाई होगी।
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आठ मेडिकल स्टोरों को चेतावनी
बांदा। नाम किसी का, काम किसी का। मेडिकल स्टोरों मेें यही खेल चल रहा है। औषधि विभाग की जांच पड़ताल मेें इस खेल का भंडाफोड़ हुआ है। कई मेडिकल स्टोर ऐसे हैं, जहां लाइसेंस किसी के नाम है और चला रहा है कोई और। अंधेरगर्दी की बात यह है कि दवा बेचने वाले को मेडिकल क्षेत्र का कोई तजुर्बा व ज्ञान भी नहीं है। ड्रग्स विभाग ने शहर के गुरहा कुआं स्थित रावत एजेंसी, रामलीला रोड स्थित सीताराम मेडिकल स्टोर, सब्जी मंडी स्थित श्याम मेडिकल स्टोर तथा न्यू मार्केट स्थित सेठ मेडिकल स्टोर समेत आठ मेडिकल स्टोर संचालकों को कड़ी चेतावनी दी है। औषधि निरीक्षक ने बताया कि मानक के अनुरूप व्यवस्था न पाए जाने पर इन मेडिकल स्टोर संचालकों को नोटिस दी जा रही है। ऐसे ही तीन मामले महोबा जिले के मेडिकल स्टोर में भी पाए गए। उन पर कार्रवाई की तैयारी है।
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