बांदा। सूखे की मार धान की फसल पर पड़ी है। जिले में अबकी 72,836 हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की रोपाई का लक्ष्य था, लेकिन बारिश की कमी से किसानों ने सिर्फ 30 फीसदी में धान रोपाई की है। इस फसल को भी बचाने में पसीने आ रहे हैं। यहां धान की पैदावार का औसत प्रति हेक्टेयर 18 क्विंटल है, पर इस साल 40 फीसदी पैदावार घटने का अनुमान है। लागत इतनी बढ़ गई है कि किसानों के हिस्से में सिर्फ पुआल ही आ रहा है।
पिछले वर्ष रिकार्ड तोड़ बारिश हुई थी, लेकिन धान का क्षेत्रफल नाममात्र था। नतीजे में कृषि विभाग ने धान के आच्छादन का लक्ष्य करीब दोगुना कर दिया। पिछले वर्ष 52 हजार हेक्टेयर में धान की रोपाई किसानों ने की थी। वहीं इस साल 72,836 हेक्टेयर में धन रोपाई का लक्ष्य था, लेकिन सूखे ने हालात ही बदल दिए। किसानों ने घर की बची-खुची पूंजी लगाकर किसी तरह 22,525 हेक्टेयर में धान रोपा है। कृषि विभाग की मानें तो पिछले वर्ष साढे़ 17 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पैदावार हुई थी जबकि सामान्य पैदावार का औसत 18 से 20 क्विंटल है। इस वर्ष धान की फसल को बचाना मुश्किल हो रहा है। किसान निजी नलकूपों से मंहगा पानी लेकर धान बचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कड़ी धूप में दूसरे दिन ही सूख जाता है। यहां की नहरें ‘हाथी का सफेद दांत’ साबित होती हैं। ऐसी स्थिति में पैदावार 40 फीसदी कम होने की संभावना है।
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उर्वरकों के बढ़े दामों ने रुलाया
बांदा। इफको ने यूरिया व डीएपी खाद के दामों में प्रति बोरी 23 व 20 रुपये की बढ़ोत्तरी कर दी है। खाद के नए दाम 24 जुलाई से लागू कर दिए गए हैं। चित्रकूटधाम मंडल में हर साल डीएपी खाद की हर साल करीब दो लाख क्विंटल और यूरिया की 2,56,500 क्विंटल की खपत है। दाम बढ़ने से अब यहां के किसानों पर हर साल एक करोड़ 57 लाख का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। यहां के किसानों को यूरिया में 42.32 लाख और डीएपी में 10.42 लाख रुपये अधिक खर्च करने पड़ेंगे।