बदौसा। बुखार से एक महिला व दो बहनों की मौत हो गई। करीब 30 बच्चे और बड़े बुखार की चपेट में हैं। स्वास्थ्य महकमा जानकारी देने के बावजूद गंभीर नहीं हैं।
कस्बे में चुन्नी देवी (55) पत्नी बाबूलाल रैकवार कई दिन से बुखार से पीड़ित थीं। रविवार की सुबह उसने दम तोड़ दिया। उधर, दुबरिया गांव के केवटन पुरवा में श्यामलाल केवट की पुत्री नीला (12), बिट्टी (9) की शनिवार को तेज बुखार से मौत हो गई। तीसरी पुत्री ममता (6) और गांव की कोमल (2), हेमराज (10), विजय (6), रीतू (12), बड़कू (10), कुसुमा (15), निर्मला (14) समेत 30 लोग बीमारी से पीड़ित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अब तक स्वास्थ्य विभाग को कोई चिकित्सक व कर्मचारी बीमारी से जूझ रहे लोगों की सुध लेने गांव नहीं पहुंचा। मृतका चुन्नी के पुत्र लल्लू ने बताया कि पैसे के अभाव में मां का इलाज नहीं हो सका। गांव वालों से चंदा कर उसकी अंत्येष्टि की। अपनी दो बेटियों को खो चुके श्यामलाल का कहना है कि नीला और बिट्टी के पेट में अचानक तेज दर्द उठा। बुखार भी दोनों को था। जिला अस्पताल ले जाते समय रास्ते में दोनों ने दम तोड़ दिया। तीसरी पुत्री निर्मला जीवन और मौत से जूझ रही है। पीएचसी में डाक्टर व कर्मियों की लापरवाही की वजह से उसका इलाज एक निजी अस्पताल में कराया जा रहा है।
सरकारी अस्पताल में ताला
कस्बे के सरकारी अस्पताल में पिछले तीन दिनों से ताला बंद है। पौहार रोड पर स्थित नवीन स्वास्थ्य केंद्र दो किलोमीटर दूर है। आमतौर पर कस्बे के लोग अपना इलाज निजी डाक्टरों के यहां कराते हैं। डाक्टर की अनुपस्थिति के चलते यहां मरीज भी यदा-कदा ही आते हैं।
झाड़-फूंक और झोलाछाप डाक्टरों का सहारा
बदौसा। बुखार व पेट दर्द से दो किशोरियों समेत तीन की मौत के बाद भी स्वास्थ्य विभाग गंभीर नहीं है। तीन मौतों के बाद गांव में कोहराम मचा है। बीमारी से पीड़ित ग्रामीण झाड़-फूंक का सहारा ले रहे हैं। झोलाछाप डाक्टरों से इलाज कराकर मौत को गले लगा रहे हैं।
दुबरियां में श्यामलाल के घर दो किशोरियों की बुखार से मौत के बाद कोहराम मचा है। तीसरी बेटी निर्मला भी बीमारी की चपेट में आकर जीवन से संघर्ष कर रही है। उसका निजी चिकित्सक के यहां इलाज चल रहा है। श्यामलाल ने बताया कि तीन दिन पहले बेटी नीला व बिट्टी को बुखार था। शनिवार को अचानक पेट में तेज दर्द हुआ, जिला अस्पताल पहुंचने से पहले दोनों की मौत हो गई। न्यू पीएचसी में ताला न बंद होता तो शायद दोनों बेटियों की जान बच जाती। गांव के बीमार 30 लोगों का सहज इलाज हो जाता है। लोग दवा के साथ-साथ झांड़-फूंक का सहारा ले रहे हैं। गांव के रामसजीवन ने बताया कि ग्रामीणों ने बीमारी के संबंध में स्वास्थ्य विभाग के आला अफसरों को फोन से अवगत कराया पर तीन दिन बीत गए कोई गांव नहीं पहुंचा।
दुबरियां में फैली बीमारी की खबर मिली है। गांव में तीन डाक्टरों की टीम भेजी गई है। बीमार लोगों की जांच और इलाज किया जा रहा है। यह वायरल फीवर है।
कैप्टन डा.आरके सिंह, सीएमओ