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1.15 करोड़ कहां से आए, नहीं बता पाए

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बांदा। चुनाव आयोग के दबाव के चलते अंतत: प्रत्याशियों ने लोकसभा चुनाव खर्च का ब्योरा आयोग को सौंप दिया है। प्रचार में 1.64 करोड़ से ज्यादा रुपये खर्च करने वाले प्रत्याशियों ने खुलासा किया है कि उन्हें 48 लाख 85 हजार 751 रुपये चंदे के रूप में प्राप्त हुए। लेकिन प्रत्याशी यह नहीं बता सके कि शेष एक करोड़ 15 लाख 75 हजार रुपये उन्हें कहां से मिले?
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चुनाव आयोग ने चुनावी खर्च का अंतिम लेखा ब्योरा जमा करने की आखिरी तारीख 15 जून तय की थी। दो प्रत्याशियों को छोड़कर शेष 11 ने खर्च ब्योरा सौंप दिया है। इन सभी ने प्रचार में कुल 1 करोड़ 64 लाख 60 हजार 852 रुपये का खर्च बताया है। आयोग ने प्रत्याशियों से यह भी पूछा था कि उनकी पार्टी से और अन्य चंदा से कितना पैसा मिला?
सिर्फ तीन प्रत्याशियों ने बताया है कि उन्हें मात्र 48 लाख 85 हजार 751 रुपये पार्टी और सहयोगियों से चंदा या सहायता मिली है। शेष 1.15 करोड़ रुपये कहां से मिले? इसका जवाब नहीं दे सके। सबसे ज्यादा 47 लाख चार हजार 346 रुपये भाजपा के विजयी प्रत्याशी भैरो प्रसाद मिश्र ने खर्च किए हैं। दूसरे नंबर पर सपा प्रत्याशी बाल कुमार पटेल हैं। इन्होंने 39,60,536 रुपये खर्च दर्शाया है। दूसरे नंबर पर रहे बसपा प्रत्याशी आरके सिंह पटेल ने प्रचार में 36,94,346 रुपये खर्च किए। कांग्रेस के विवेक कुमार सिंह ने कुल 28, 90,735 रुपये खर्च दिखाए हैं। भाकपा उम्मीदवार रामचंद्र ‘सरस’ ने 2,56,160 रुपये का खर्च दर्शाया है।
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चंदा बंटोरने में भाजपा प्रत्याशी भैरो प्रसाद मिश्र अव्वल रहे। उन्होंने आयोग को बताया है कि उन्हें पार्टी से 25 लाख रुपये मिले। इसके अलावा 10 लाख रुपये चित्रकूट ऑटो मोबाइल्स और 10 लाख रुपये मनोज कुमार मिश्र (कर्वी) से मिले। कुल 45 लाख रुपये की चुनावी मदद मिली है। सपा प्रत्याशी बाल कुमार पटेल ने चंदे के तौर पर कुल 3,40,000 रुपये मिलना बताए हैं। इसमें उन्हें डेढ़ लाख रुपये शोभा ब्रिक फील्ड, एक लाख रुपये जितेंद्र यादव और 90 हजार रुपये सावित्री देवी से प्राप्त होना दर्शाया है। भाकपा के रामचंद्र ‘सरस’ ने बताया है कि उन्हें पार्टी की ओर से 15 हजार रुपये मिले। इसके अलावा 45,751 रुपये अन्य चंदा प्राप्त हुआ।
शेष प्रत्याशियों ने चुनावी खर्च तो आयोग को बताया है लेकिन इसकी आमद का जरिया नहीं बताया। हैरत की बात यह है कि इस पर भी जिला निर्वाचन अधिकारी ने खर्च ब्योरों को स्वीकार करते हुए आयोग के समक्ष अपनी सहमति जता दी है। उन्होंने प्रत्याशियों द्वारा पेश ब्योरा चुनाव आयोग को भेज दिया है। आयोग के प्रेक्षक ने भी इसे हरी झंडी दे दी है।

भाजपा और भाकपा ने ही दिया पैसा
बांदा। लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए सिर्फ भाजपा ने अपने प्रत्याशी को पैसा दिया। इसके अलावा भाकपा ने भी अपने उम्मीदवार को पैसे की मदद दी। अन्य प्रत्याशियों ने पार्टी से आर्थिक सहायता की कोई जानकारी चुनाव आयोग को नहीं दी है।
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