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योजनाओं को ढूंढे नहीं मिलती जगह

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अभिलेखों में दर्ज है 7140 हेक्टेयर ग्राम समाज की जमीन
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बांदा। सरकारी भवन निर्माण व अन्य योजनाओं के लिए भले ही ग्राम समाज की जमीन ढूंढे नहीं मिल रही, लेकिन राजस्व अभिलेखों में जिले में 7140 हेक्टेअर कृषि योग्य भूमि दर्ज है। तहसीलों में भी अवैध कब्जे से संबंधित गिने-चुने मुकदमे चल रहे हैं। अधिकारियों को ठीक से यह भी पता नहीं कि कितनी जमीन पर सरकारी इमारतें बन गई हैं और अब कितनी जमीन उनके पास सुरक्षित है।
उच्च न्यायालय द्वारा ग्राम सभा की जमीन, तालाब, चकरोड, झीलों आदि पर अवैध कब्जों से बेदखली संबंधी आदेश के बावजूद अधिकारियों को अभी शासनादेश आने का इंतजार है। राजस्व अधिकारियों को ग्राम समाज की जमीन से संबंधित विस्तृत जानकारी तक नहीं है। यहां तक की विशिष्ट मंडी स्थल, 400 केवीए बिजली सब स्टेशन, केंद्रीय विद्यालय आदि के लिए दो साल तक ग्राम समाज की जमीन ढूंढे नहीं मिली। वहीं राजस्व अभिलेखों में 7140 हेक्टेयर जमीन दर्ज है। इसमें नवगठित पैलानी व सदर तहसील में 2807 हेक्टेयर, नरैनी में 2058 हेक्टेयर, बबेरू में 1329 हेक्टेयर और अतर्रा तहसील में 964 हेक्टेयर जमीन ग्राम समाज के नाम दर्ज है। इसमें प्राचीन परती, नवीन परती व कृषि योग्य भूमि शामिल है।
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राजस्व विभाग की ओर से राजस्व परिषद को भेजी गई रिपोर्ट के मुताबिक बसपा सरकार में अनुसूचित जाति के पुराने अवैध कब्जा धारकों को उनका मालिकाना हक देने का शासनादेश जारी किया गया था। इसमें 01 अप्रैल वर्ष 2010 से 30 अवैध कब्जा धारकों को 8.300 हेक्टेयर ग्राम समाज की जमीन का मालिक बनाया दिया गया था। तहसीलों में तालाबाें, चकरोडों व ग्राम समाज की जमीन में अवैध कब्जा से संबंधित सिर्फ 180 मुकदमे चल रहे हैं। सदर तहसील में रास्ता व चकरोड पर अवैध कब्जा से संबंधित 4 मुकदमे विचाराधीन हैं। इनमें पडुई व करछा गांव में एक-एक और मटौंध के दो मामले शामिल हैं। तालाबों पर अवैध कब्जा से संबंधित सिर्फ 3 मुकदमे हैं। इनमें चिल्ली गांव में एक और गोयरा मुगली गांव में दो तालाब शामिल हैं।
इस संबंध में सदर तहसीलदार संत कुमार कहते हैं कि ग्राम समाज की जमीन, चकरोड व तालाब आदि पर अवैध कब्जे के संबंध में लेखपाल रिपोर्ट देते हैं। इसी के आधार पर अवैध कब्जा धारकों के विरुद्ध कार्रवाई की जाती है। उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में लेखपालों की रिपोर्ट पर तेजी के साथ कार्रवाई की जाएगी। ग्राम समाज की जमीन से सभी अवैध कब्जे हटाए जाएंगे।
इमारतें बनने के बाद कब्जा परिवर्तन नहीं
बांदा। राजस्व कर्मियों का कहना है कि अधिकांश ग्राम समाज की जमीन पर स्कूल, पंचायत भवन, सामुदायिक भवन, बारात घर, नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र समेत तमाम इमारतें बन गई। राजस्व अभिलेखों में यह जमीन अभी भी ग्राम समाज के नाम दर्ज है। यहां तक कि शहर में बनी सदर तहसील तक ग्राम समाज की बंजर जमीन के नाम अभी भी दर्ज है। कागजों में कब्जा परिवर्तन न होने से अधिक जमीन दर्ज दिखाई देती है।
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तालाबों से नहीं हटाए जा सके अवैध कब्जे
बांदा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत तालाबों पर अवैध कब्जों को लेकर वित्तीय वर्ष 2012-13 में तत्कालीन जिलाधिकारी जीएस नवीन कुमार ने पूरे जिले में अभियान चलाया था। तमाम तालाब की भीटों पर बनी पक्की इमारतें तक ढहा दी गई थी। पुराई कर अवैध कब्जे हटाए गए थे। बबेरू कस्बे में कई दुकानें ध्वस्त कर दी गई थीं। उनके तबादले के बाद यह अभियान ठप पड़ गया। सबसे अधिक अतर्रा और मटौंध कस्बे के एतिहासिक तालाब अतिक्रमण की गिरफ्त में हैं। अतर्रा में तालाब में पायलिंग कर पक्की इमारतें बन गईं। अधिकारियों को इसकी सुध नहीं है।
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