फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

डकैतों के लिए ‘कुटीर उद्योग’ बनी ‘पकड़’

विज्ञापन
विज्ञापन
बांदा। पाठा के बीहड़ों में अपहरण कर फिरौती वसूलने की घटनाओं में तेजी से इजाफा हुआ है। तीन दशक से ‘पकड़’ का बीज बीहड़ों में खूब फल-फूल रहा है। आतंक कायम करने के लिए शुरु हुआ अपहरण का सिलसिला डकैतों के लिए ‘कुटीर उद्योग’ बन गया है। अपहरण की वारदातों पर पुलिस लगाम नहीं लगा पाई।
विज्ञापन

पांच दशक से पाठा के बीहड़ में डकैत रक्तबीज की तरह पले-बढ़े। दस्यु सरगना राजा रगौली, सीताराम, हनुमान, रंपा, खरदूषण, सुग्गा, ददुआ, अंबिका पटेल उर्फ ठोकिया, सुंदर पटेल उर्फ रागिया जैसे कुख्यात डकैतों को पुलिस ने मार गिराया हो लेकिन पाठा के बीहड़ों में आज भी बलखड़िया, जुग्गी पटेल, बबुली कोल, गौरी यादव और संग्राम सिंह आदि डकैत पाठा के बीहड़ों में सक्रिय हैं। 70 के दशक में बागी होकर दादुओं और सामंतों के खिलाफ पाठा के बीहड़ों से शुरु हुई जुल्म के खिलाफ लड़ाई मूल रास्ते से भटक कर कमाई का जरिया बन गई है। 80 के दशक में बीहड़ में कूदने वाले पूर्व दस्यु सरगना गया कुर्मी उर्फ गया बाबा ने अपराध की शैली बदल दी। उसने दादुओं और जमींदारों के स्थान पर दोस्तों और कुछ स्वजातीय लोगों का संरक्षण हासिल किया। बीहड़ में आतंक कायम करते ही ‘पकड़’ की शुरुआत की। गया बाबा के आत्मसमर्पण करने के बाद गिरोह की कमान पुलिस मुठभेड़ में मारे जा चुकेे दस्यु सरगना शिव कुमार उर्फ ददुआ के हाथ आ गई। वर्ष 1986 में रामू पुरवा नरसंहार के बाद ददुआ ने दिनदहाड़े मानिकपुर-टिकरिया स्टेशन के बीच मध्य रेलवे के दो अधिकारियों को अगवा करके रिहाई के बदले लाखों रुपए फिरौती वसूली। 90 के दशक में ददुआ ने कर्वी के प्रतिष्ठित पेट्रोल पंप मालिक के पुत्र का अपहरण करते हुए सनसनी फैला दी। रिहाई के लिए डकैतों ने पांच लाख रुपए फिरौती मांगी। फिरौती न मिलने पर गैंग ने व्यवसायी पुत्र की हत्या कर लाश जंगल में फेंक दी।
वर्ष 2001 में पुलिस मुठभेड़ में मारे जा चुके अंबिका पटेल उर्फ ठोकिया ने फतहेगंज सीएचसी में तैनात डा.दयाशंकर गुप्ता का असलहों के दम पर अपहरण कर लिया। एक पखवारा बाद परिजनों ने गैंग को 5 लाख रुपए देकर चिकित्सक को रिहा करा लिया। 4 साल पहले रागिया गिरोह ने फतेहगंज थाना क्षेत्र में स्कूल से लौट रहे प्राइमरी टीचर को अगवा कर दो लाख रुपए फिरौती वसूली। दस्यु संग्राम सिंह ने बालू भरने गए दो किशोरों को दिनदहाड़े अगवा कर परंपरा को बढ़ाया है।
विज्ञापन

फिरौती की रकम से खरीदे जाते हैं असलहे
बांदा। फिरौती की रकम से डकैत गिरोह असलहे और मैन पावर और फायर पावर बढ़ाने में खर्च करते हैं। शेष रकम गैंग के सदस्यों में बांट दी जाती है। सूत्रों की माने तो 12 हजार का ईनामी दस्यु संग्राम सिंह बीहड़ में नया-नवेला है। गैंग का फायर पावर और मैन पावर दोनों ही कमजोर हैं। गैंग में आधा दर्जन सदस्य हैं। गैंग में चार 315 बोर राइफल और दो डबल बैरल मात्र हैं। संग्राम सिंह ने किशोरों का अपहरण मैन और फायर पावर बढ़ाने के लिए किया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें