बांदा। बरगदाही अमावस्या पर सुहागिनों ने वट वृक्ष (बरगद) की परिक्रमा और पूजा की। कच्चा सूत बरगद पर लपेटा और पति के दीर्घायु की कामना की। सती सावित्री की कथा सुनाकर व्रत का महत्व बताया।
शनिवार को ज्येष्ठ माह की अमावस्या पर सुहागिन महिलाएं आटा और गुड़ के गुलगुले, हल्दी से रंगी सूत की माला व एपन समेत पूजन सामग्री लेकर बरगद के पेड़ों तले इकट्ठी हुईं। सजी-धजी सुहागिनों ने पूजा अर्चना के बाद वट वृक्ष पर कच्चे सूत का धागा लपेटकर फेेरे लगाए। बरगद की डोड़ी और चना निगलकर व्रत पारायण किया। सती सावित्री कथा सुनाते हुए बताया कि जंगल में लकड़ी लेने गए सत्यवान की पेड़ से गिरकर मृत्यु हो गई। सावित्री अपने पति सत्यवान का सिर गोद में रखकर बरगद के नीचे तपस्या करने लगी। अंत में यमराज सत्यवान को जीवित छोड़कर वापस लौटने को मजबूर हो गया। बलखंडी नाका, सिंहवाहिनी मंदिर, बुद्धराम कुआं, बांबेश्वर मंदिर, स्वराज कालोनी, इंदिरा नगर, आवास-विकास, गायत्री नगर, पोड़ा बाग, अलीगंज समेत सभी मोहल्लों में बरगद की पूजा हुई।