बांदा। चित्रकूटधाम मंडल में पेयजल व्यवस्था सुधारने को केंद्र सरकार ने बुंदेलखंड पैकेज से भले ही अरबों रुपये लुटाए हों, पर यहां आज भी शहर व ग्रामीण इलाकों में लोग पानी को मोहताज हैं। जल निगम विभाग की लापरवाही से पेयजल योजनाएं परवान नहीं चढ़ पा रही हैं। ग्राम पेयजल योजना के तहत मंडल को पिछले वित्तीय वर्ष में 55 करोड़ 66 लाख रुपये मिले। इस धनराशि से बांदा में अतर्रा, बबेरू व मर्का में ओवरहेड टैंक, नलकूप, पाइप लाइन, स्टैंडपोस्ट व बिजली कनेक्शन होना था लेकिन जल निगम ने 50 फीसदी भी काम पूरा नहीं किया।
भीषण गर्मी में मंडल में पेयजल संकट गहराने लगा है। वर्ष 2013-14 में बुंदेलखंड पैकेज से बांदा और महोबा को शासन से ग्राम पेयजल योजनाओं के लिए 55 करोड़ 66 लाख रुपये मिले। इस धनराशि से बांदा जनपद में अतर्रा में 13 करोड़ 49 लाख रुपये की लागत से, बबेरू में 14 करोड़ 6 लाख तथा मर्का में 16 करोड़ 96 लाख 79 हजार रुपये की लागत से ओवरहेड टैंक, नलकूप, पाइप लाइन व स्टैंड पोस्ट बनवाकर पाइप लाइन के जरिए घरों में स्वच्छ पेयजल पहुंचाना था। करीब 60 फीसदी धनराशि जल निगम को पिछले वर्ष मई में मिल गई थी, लेकिन अभी तक 50 फीसदी भी काम पूरा नहीं हुआ।
महोबा जनपद में ग्राम पेयजल योजना के लिए वर्ष 2013-14 में रिवई सुनैचा में 5 करोड़ 50 लाख की स्वीकृति मिली। इसमें जल निगम को 2 करोड़ 15 लाख रुपये मिले। मवई खुर्द में 3 करोड़ 47 लाख में 1 करोड़ 68 लाख रुपये, श्रीनगर पेयजल योजना के लिए 40 लाख की स्वीकृति मिली। इसमें 35 लाख मिले। अजनर में एक करोड़ 9 लाख रुपये में 96 लाख रुपये मिले। जल निगम ने यहां मात्र नाममात्र का कार्य कराया है। बभनौरी में 8 लाख 72 हजार रुपये और गंज में 36 लाख 19 हजार रुपये की स्वीकृति मिली। इसमें 32 लाख रुपये खाते में आ गए हैं। सूपा में 10 लाख 36 हजार में 9 लाख 20 हजार, धरौन में 37 लाख 83 लाख की धनराशि में जल निगम को 33 लाख 62 हजार हासिल हुए। फिलहाल विभाग अगली किश्त देर में आने की वजह बताकर पल्ला झाड़ रहा है। रिपोर्ट में पेयजल योजनाएं 60 से 80 फीसदी पूरी होने के बावजूद इस गर्मी में लोगों को शुद्ध पेयजल नहीं मिल सका।
शीघ्र हैंडओवर होंगी परियोजनाएं : एसई
बांदा। उत्तर प्रदेश जल निगम निर्माण मंडल (सिविल) अनिरुद्ध गोपाल का कहना है कि ज्यादातर पेयजल परियोजनाओं का कार्य तकरीबन पूरा हो गया है। कुछ बजट की कमी है। जैसे ही अगली किश्त आएगी। तेजी से कार्य पूरा कराया जाएगा। कुछ पेयजल परियोजनाओं को हैंडओवर करने की प्रक्रिया चल रही है।